देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित होटल हयात सेंट्रिक में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान ‘शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी, जब समाज के प्रत्येक बच्चे तक समान अवसरों के साथ पहुंचे। उन्होंने समावेशी शिक्षा को वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें कोई भी बच्चा पीछे न रह जाए।

‘ब्रिजिंग लर्निंग गैप्स थ्रू विजुअल लर्निंग एंड अर्ली इंटरवेंशन’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करना ही वास्तविक परमार्थ है। उन्होंने शाइन अवि आटिज्म फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी संवेदनशील सोच और सकारात्मक पहल समाज में परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण है।
रिवर्स पलायन का प्रेरक उदाहरण
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि करीब तीन दशक तक अमेरिका में रहने के बाद अनीता शर्मा थपलियाल का अपनी मातृभूमि लौटकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कार्य करना रिवर्स पलायन का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ने का उनका संकल्प सराहनीय है और वे इस सोच की ब्रांड एंबेसडर हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड इस पहल में पूरी तरह उनके साथ खड़ा रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और राज्य सरकार समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध हो सकें।
150 से अधिक विशेष पुस्तकें और शिक्षण संसाधन लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान ‘शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम’ के अंतर्गत 150 से अधिक विशेष पुस्तकें और विजुअल लर्निंग संसाधन भी जारी किए गए। इन संसाधनों को विशेष रूप से उन बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जिन्हें भाषा, संचार, सामाजिक व्यवहार, संज्ञानात्मक विकास, शैक्षणिक तैयारी और दैनिक जीवन कौशल विकसित करने के लिए अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है।
विशेष बच्चों की क्षमता को पहचानने की जरूरत
विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि अनीता शर्मा थपलियाल ने ऐसे विषय को चुना है, जो केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने महान आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए कहा कि उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलने पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चे भी अपनी प्रतिभा से समाज और दुनिया को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शाइन अवि की यह पहल ऐसे बच्चों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।
विजुअल लर्निंग को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास
शाइन अवि आटिज्म फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल ने बताया कि विजुअल लर्निंग करिकुलम का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की सीखने की आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए सरल, प्रभावी और सुलभ शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर सीख सकें और मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकें।
