बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के चर्चित सिमगढ़ी शाखा डाकघर गबन मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी नाहर की अदालत ने तत्कालीन शाखा डाकपाल सुरेंद्र सिंह पंचपाल को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 8,000 रुपये के जुर्माने, धारा 467 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास एवं 5,000 रुपये के जुर्माने तथा धारा 471 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और 3,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। कुल मिलाकर आरोपी पर 16,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं न्यायालय के आदेशानुसार प्रभावी होंगी।
जांच में सामने आया 36 लाख रुपये के गबन का मामला
सहायक लोक अभियोजक गौरव अग्रवाल के अनुसार, वर्ष 2024 में कमेड़ीदेवी क्षेत्र के खाताधारकों द्वारा सिमगढ़ी शाखा डाकघर में जमा राशि के गबन की शिकायतें डाक विभाग को प्राप्त हुई थीं। शिकायतों के बाद तत्कालीन डाक अधीक्षक, अल्मोड़ा राजेश कुमार विनवाल ने छह सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।
प्रारंभिक जांच में शाखा डाकघर के खातों में लगभग 7 लाख रुपये की वित्तीय कमी पाई गई। साथ ही, आरोपी द्वारा 18 फर्जी पासबुक तैयार कर 59 खाताधारकों के साथ करीब 26 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का खुलासा हुआ। विस्तृत जांच में कुल गबन की राशि बढ़कर लगभग 36 लाख रुपये तक पहुंच गई।
कई धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
जांच रिपोर्ट के आधार पर कांडा थाने में तत्कालीन थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक खुशवंत सिंह की ओर से आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
मामले की विवेचना के दौरान खाताधारकों, डाक विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए और आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए गए। इसके बाद उपनिरीक्षक कैलाश सिंह बिष्ट ने विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
दो वर्षों तक चली सुनवाई
करीब दो वर्ष तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 47 दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी सहायक लोक अभियोजक रश्मि कुलकोडिया ने की।
