नैनीताल। उत्तराखंड में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उससे आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव, संबंधित विभागों के सचिव, भारत सरकार तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) सहित सभी संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को 7 अगस्त 2026 तक अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह सुनवाई 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘City Hounded by Strays, Kids Pay Price’ मामले में जारी निर्देशों के अनुपालन के क्रम में की जा रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या अब सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर विषय बन चुकी है और इससे सबसे अधिक खतरा बच्चों को है।
अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस समस्या के समाधान के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से मुख्य केंद्रीय सरकारी स्थायी अधिवक्ता सुनीति भट्ट, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता पी.एस. बिष्ट तथा NHAI की ओर से अधिवक्ता नरेश पंत उपस्थित रहे।
मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। इस दौरान हाईकोर्ट यह समीक्षा करेगा कि सभी संबंधित अधिकारियों एवं विभागों ने समय पर अनुपालन हलफनामे दाखिल किए हैं या नहीं।
हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब राज्य प्रशासन को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि आवारा कुत्तों और अन्य आवारा पशुओं से आम लोगों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं तथा भविष्य में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।
