रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जनपद के रुद्रपुर क्षेत्र में किसानों और एक उद्योगपति के बीच भूमि विवाद का मामला सामने आया है। लांबाखेड़ा गांव के किसानों ने एक उद्योगपति पर उनकी कृषि भूमि खरीदने के लिए दबाव बनाने और प्रभावशाली लोगों का नाम लेकर मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर किसानों ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) और उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

किसानों का आरोप है कि उनके गांव के समीप एक औद्योगिक प्लांट स्थापित किया जा रहा है। प्लांट निर्माण के बाद संबंधित उद्योगपति आसपास की कृषि भूमि खरीदने का प्रयास कर रहा है। किसानों का कहना है कि उनसे बार-बार अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने के लिए कहा जा रहा है, जबकि वे अपनी कृषि भूमि बेचने के इच्छुक नहीं हैं।
शिकायत में किसानों ने आरोप लगाया है कि उद्योगपति स्वयं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बिजनेस पार्टनर बताकर प्रभाव का हवाला देता है और इसी आधार पर भूमि बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। किसानों का दावा है कि उन्हें यह भी संकेत दिया गया कि जमीन नहीं बेचने की स्थिति में उन्हें विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि भूमि बेचने से इनकार करने पर उनके खेतों तक पहुंचने वाले सरकारी मार्ग को बंद करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि रास्ता अवरुद्ध किया गया तो खेती-किसानी प्रभावित होगी और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मामले को लेकर बड़ी संख्या में किसान रुद्रपुर कोतवाली पहुंचे और क्षेत्राधिकारी विभव सैनी तथा उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट को शिकायती पत्र सौंपा। किसानों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट ने बताया कि किसानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज प्राप्त कर लिए गए हैं और मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं क्षेत्राधिकारी विभव सैनी ने कहा कि शिकायत प्राप्त हो गई है और उसके सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। उन्होंने मामले को संवेदनशील बताते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
फिलहाल प्रशासन ने किसानों को आश्वस्त किया है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। वहीं किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
