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देहरादून: मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में उत्तराखंड की हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी ने एक नई पहल शुरू की है। अब यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले छात्रों को मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को बीमारी से जुड़े शोध में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने और विशेष मेडिकल उपकरणों को बेहतर तरीके से समझने में सक्षम बनाना है।

 

इसके लिए हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी ने आईआईटी मंडी और आईआईटी रोपड़ के साथ करार किया है। यूनिवर्सिटी अन्य आईआईटी संस्थानों के साथ भी इसी तरह की साझेदारी करने की दिशा में काम कर रही है।

IIT के प्रोफेसर करेंगे मेडिकल छात्रों का मार्गदर्शन

इस पहल के तहत पीएचडी छात्रों को शोध के दौरान मेडिकल फैकल्टी के साथ-साथ आईआईटी के विशेषज्ञ इंजीनियरिंग प्रोफेसरों का मार्गदर्शन भी मिलेगा। इससे छात्र मेडिकल रिसर्च में इंजीनियरिंग क्षेत्र की नई तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करना सीख सकेंगे।

यूनिवर्सिटी के अनुसार, छात्रों के पाठ्यक्रम और विषय-वस्तु में भी जरूरत के मुताबिक बदलाव किया जाएगा, ताकि मेडिकल और इंजीनियरिंग दोनों क्षेत्रों की जानकारी को शोध कार्य से जोड़ा जा सके।

डिग्री पर भी दर्ज होगी इंजीनियरिंग ट्रेनिंग

इस कार्यक्रम के तहत पीएचडी पूरी करने वाले छात्रों की डिग्री पर यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा कि उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध के साथ-साथ आईआईटी फैकल्टी के नेतृत्व में संबंधित इंजीनियरिंग प्रशिक्षण भी हासिल किया है।

यूनिवर्सिटी का मानना है कि इससे छात्रों को पीएचडी के बाद प्रोफेसर, वैज्ञानिक और अन्य तकनीकी एवं शोध क्षेत्रों में करियर बनाने में मदद मिलेगी। मेडिकल और इंजीनियरिंग के संयुक्त कौशल से छात्रों के लिए रोजगार और रिसर्च के नए अवसर भी खुल सकते हैं।

IIT की हाईटेक लैब में भी कर सकेंगे रिसर्च

करार के तहत मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र जल्द ही संबंधित कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकेंगे। चयन के बाद छात्रों को शोध के दौरान आईआईटी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा।

इन प्रयोगशालाओं में उपलब्ध आधुनिक तकनीक और संसाधनों की मदद से छात्र अपने मेडिकल रिसर्च को नई दिशा दे सकेंगे। खासतौर पर बीमारी से संबंधित तकनीकी समाधान, मेडिकल उपकरणों और नई स्वास्थ्य तकनीकों पर शोध को इससे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पहले PhD छात्रों से होगी शुरुआत, फिर PG छात्रों तक पहुंचेगा कार्यक्रम

फिलहाल यह पहल शुरुआती चरण में पीएचडी शोध छात्रों के लिए शुरू की जा रही है। यूनिवर्सिटी की योजना है कि आने वाले समय में इस तरह का प्रशिक्षण मेडिकल पीजी छात्रों के लिए भी शुरू किया जाए।

यूनिवर्सिटी का मानना है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। ऐसे में मेडिकल छात्रों को इन क्षेत्रों की जानकारी देना उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

‘AI और इंजीनियरिंग को मेडिकल शिक्षा से जोड़ना जरूरी’

हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. भानु दुग्गल ने कहा कि मौजूदा दौर में स्वास्थ्य शिक्षा को तकनीकी शिक्षा से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता। छात्रों को बेहतर डॉक्टर और वैज्ञानिक बनाने के लिए मेडिकल शिक्षा के साथ एआई और इंजीनियरिंग तकनीक को जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का प्रयास छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए व्यापक और आधुनिक प्रशिक्षण देना है, ताकि वे स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध के साथ नई तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।

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