नैनीताल:
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में स्थित विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल कैंची धाम में सोमवार, 15 जून को बाबा नीम करोली महाराज का स्थापना दिवस बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने सुबह 4 बजे से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगा दीं।

कैंची धाम इस समय भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां हर वर्ष 15 जून को आयोजित होने वाले स्थापना दिवस मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
स्थापना दिवस के अवसर पर अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस सहित कई देशों से भक्त बाबा नीम करोली महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे। विदेश से आए श्रद्धालुओं ने धाम के वातावरण और व्यवस्थाओं की सराहना की।
अमेरिका से आए भक्त मैक्स विलियम्स ने बताया कि वे वर्ष 2020 से बाबा नीम करोली महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित हैं और वर्तमान में अमेरिका में उनकी शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कैंची धाम पहुंचकर गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव होने की बात कही।
आस्था और चमत्कारों की मान्यता
भक्तों के अनुसार नीम करोली बाबा को भगवान हनुमान का स्वरूप माना जाता है। उनके जीवन से जुड़ी कई कथाएं और चमत्कार आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का आधार हैं।
स्थानीय परंपराओं के अनुसार बाबा से जुड़ी अनेक घटनाएं, जैसे भंडारे में भोजन की कमी को पूरा करने की कथाएं और भक्तों के रोग निवारण से जुड़े प्रसंग, उनकी दिव्य शक्ति के रूप में वर्णित किए जाते हैं।
ऐतिहासिक कथा और धाम की स्थापना
कैंची धाम की स्थापना से जुड़ी मान्यता के अनुसार, स्थानीय निवासी धर्मानंद तिवारी को एक संत के दर्शन हुए थे, जिन्होंने भविष्य में पुनः मिलने का वचन दिया था। बाद में नीम करोली बाबा ने इसी स्थान पर मंदिर निर्माण का निर्देश दिया, जिसके बाद कैंची धाम की स्थापना हुई।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
स्थापना दिवस पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। नैनीताल के एसएसपी के अनुसार पूरे क्षेत्र को 4 जोन और 8 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। एसटीएफ, बीडीएस, पैरामिलिट्री बलों और ड्रोन कैमरों की सहायता से लगातार निगरानी की जा रही है।
ट्रैफिक और शटल व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। कैंची धाम मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। भीमताल, भवाली, नैनीताल, खैरना, अल्मोड़ा, हल्द्वानी और काठगोदाम से शटल बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
निजी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोककर श्रद्धालुओं को शटल सेवा के माध्यम से धाम तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष स्टीकर प्रणाली भी लागू की गई है।
प्रशासन की अपील
पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें, यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें, ताकि दर्शन यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।
