नई दिल्ली: महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को सुनाए अपने फैसले में बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने 2 जुलाई को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर 7 जुलाई 2023 को अदालत ने संज्ञान लिया था। चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत आरोप लगाए गए थे। बाद में 10 मई 2024 को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था, जबकि 20 जुलाई 2023 को उन्हें और सह-आरोपी विनोद तोमर को जमानत मिल गई थी।
सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि कथित घटना की तारीख 7 सितंबर 2022 को वह भारत में मौजूद नहीं थे। इस संबंध में दिल्ली पुलिस से जांच कराने की मांग भी की गई, लेकिन अदालत ने इस याचिका को स्वीकार नहीं किया।
बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव मोहन ने अदालत में दलील दी कि केंद्र सरकार द्वारा गठित ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पहलवानों का पहला धरना 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर हुआ था और अगले दिन एक महिला पहलवान ने सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई थी।
वहीं, महिला पहलवानों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने तर्क दिया कि ओवरसाइट कमेटी का गठन नियमों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने अदालत से कहा कि जिन धाराओं के तहत पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, उन्हीं के आधार पर आरोप तय किए जाने चाहिए।
करीब दो वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया और लंबी सुनवाई के बाद आए इस फैसले के साथ अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपों से मुक्त कर दिया। यह फैसला देश के सबसे चर्चित खेल और कानूनी मामलों में से एक में अहम माना जा रहा है।
