पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा- पार्टी और उत्तराखंड के लिए सिपाही की तरह काम करूंगा; पीएस जीना मामले में बोले- सुरक्षात्मक नहीं, आक्रामक तरीके से अपनी लड़ाई खुद लड़ूंगा
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत एक बार फिर सक्रिय राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। कुछ माह पहले खुद को चुनावी राजनीति से अलग करने की बात कह चुके रावत अब हरिद्वार से चुनाव मैदान में उतरने की इच्छा जता रहे हैं। वहीं, पीएस जीना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी है।
रावत का कहना है कि वह इस मामले में रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय अपनी लड़ाई खुद आक्रामक तरीके से लड़ेंगे। उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने लंबे राजनीतिक जुड़ाव को लेकर भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकते।
एक विस्तृत बातचीत में हरीश रावत ने उत्तराखंड के विकास, अपनी राजनीतिक भूमिका, कांग्रेस से अपने रिश्ते, पार्टी छोड़ने के कथित प्रलोभन और अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

सवाल: अब हरीश रावत क्या साबित करना चाहते हैं?
जवाब: मैं सिपाही की तरह पार्टी और उत्तराखंड के लिए काम करूंगा। मेरा अपना मानना है कि जिस सोच और समझ के साथ उत्तराखंड बनना चाहिए था, वह उस रूप में नहीं बन पाया। हम उत्तर प्रदेश और बिहार आदि राज्यों की कॉपीबुक यानी नकल बन गए।
रावत ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में उत्तराखंड के लिए एक अलग दिशा और पहचान बनाने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
उन्होंने कहा कि जब वह लीक से हटकर उत्तराखंड के लिए अलग लीक बनाने की कोशिश कर रहे थे, उसी दौरान राष्ट्रपति शासन लग गया। उनके अनुसार, इसके बाद बजट और कई योजनाओं की दिशा प्रभावित हुई।
रावत ने कहा कि इसके चलते कई रास्ते गड़बड़ा गए। कुछ योजनाएं आगे बढ़ीं, कुछ आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कई योजनाएं, कार्यक्रम और मुद्दे आधे-अधूरे रह गए। उनका आरोप है कि बाद की सरकार ने उनमें से कुछ पर अपनी मुहर लगाने से इनकार कर दिया।
सवाल: आपकी पार्टी के तमाम लोग दूसरी जगह चले गए। क्या आपको भी कभी ऐसा प्रलोभन या मौका मिला कि आप दूसरी पार्टी में शामिल हो जाएं?
जवाब: रावत ने कहा कि उनके बारे में सभी जानते हैं कि वह दो चीजें नहीं कर सकते—कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकते।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना करना पड़े, वह कांग्रेस के साथ अपने रिश्ते को खत्म नहीं करना चाहते। रावत ने कहा कि करीब 60 साल पहले उन्होंने कांग्रेस का झंडा थामा था और उनकी इच्छा है कि जीवन के अंतिम दौर तक उसी झंडे के साथ जुड़े रहें।
उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों को वह अपने लिए बोनस समय मानते हैं और इस दौरान भी कांग्रेस का झंडा थामकर काम करना चाहते हैं।
‘राजनीतिक चिकोटीबाजों से मुकाबला करना जानता हूं’
अपनी राजनीतिक शैली और विरोधियों के सवालों पर रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह वर्षों से ऐसे राजनीतिक विरोधियों का सामना करते आए हैं।
रावत ने अपने अंदाज में कहा कि उनकी जांघों में अभी काफी ताकत है और वह ऐसे लोगों का मुकाबला करना जानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर दोनों तरफ से राजनीतिक जवाब दिया जा सकता है और समय इसका इलाज करेगा।
उनके इस बयान को उनके राजनीतिक तेवर और सक्रिय भूमिका बनाए रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सवाल: क्या आपको नहीं लगता कि इस लड़ाई में आप कहीं न कहीं अकेले पड़ गए हैं?
इस सवाल के जवाब में रावत ने कहा कि उनके साथ उनका विवेक और ईमान है। उन्होंने अपनी मां और उत्तराखंड की जनता को भी अपने साथ बताया।
उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वह बीमार थे और डॉक्टरों ने उन्हें छह सीढ़ियों से ज्यादा चढ़ने की सलाह नहीं दी थी। इसके बावजूद उनका कहना है कि वह छह सीढ़ियां चढ़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दौड़ रहे हैं।
रावत ने कहा कि उनके लिए जीवन से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जिस कलंक को भाजपा ने उन पर लगाने का प्रयास किया है, उससे वह मुक्त हों।
’42 हजार से ज्यादा लोगों को दी नियुक्तियां’
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान रोजगार और नियुक्तियों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान 42 हजार से अधिक लोगों को नियुक्तियां दी गईं।
रावत ने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को संस्थागत बनाने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बनाए जाने का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कहा कि उस समय राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं नहीं हो पा रही थीं, इसलिए भर्ती बोर्ड बनाए गए।
उन्होंने दावा किया कि इन संस्थाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करने के दिए थे निर्देश
रावत ने कहा कि उनके कार्यकाल में भर्ती और नौकरियों से जुड़े कई मामले सामने आ रहे थे। उनका कहना था कि वह नहीं चाहते थे कि किसी भी प्रकार का कलंक उत्तराखंड पर लगे।
उन्होंने कहा कि भर्ती बोर्डों को स्पष्ट निर्देश थे कि कामकाज में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाए। रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों को अपनी सरकार के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल करते हुए कहा कि उनकी कोशिश पारदर्शी व्यवस्था बनाने की थी।
पीएस जीना मामले में क्या बोले हरीश रावत?
पीएस जीना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के संबंध में रावत ने कहा कि उन पर अनावश्यक रूप से आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मामले में रक्षात्मक भूमिका अपनाने के बजाय खुद अपनी लड़ाई लड़ेंगे।
रावत का कहना है कि वह अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने के लिए पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक जीवन से जुड़े आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के आधार पर ही की जानी होगी।
हरिद्वार से चुनावी राजनीति में वापसी के संकेत
कुछ समय पहले चुनावी राजनीति से खुद को अलग करने की बात कहने वाले हरीश रावत का अब हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताना उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
रावत ने बातचीत के दौरान अपनी सक्रियता को लेकर स्पष्ट संकेत दिए। हालांकि किसी चुनाव के लिए अंतिम उम्मीदवारी और पार्टी का निर्णय संबंधित समय पर पार्टी के आधिकारिक फैसले से ही स्पष्ट होगा।
उत्तराखंड की अलग पहचान को लेकर रावत का जोर
हरीश रावत ने उत्तराखंड के विकास मॉडल को लेकर भी अपनी पुरानी सोच दोहराई। उनका कहना है कि राज्य को दूसरे राज्यों की नकल करने के बजाय अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, संसाधनों और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप विकास का अलग मॉडल तैयार करना चाहिए।
उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान इसी दिशा में काम करने का दावा किया और कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कई योजनाएं और कार्यक्रम पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सके।
रावत के बयान के प्रमुख बिंदु
- कांग्रेस छोड़ने की संभावना से इनकार किया।
- गांधी-नेहरू परिवार के साथ अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया।
- पार्टी और उत्तराखंड के लिए सिपाही की तरह काम करने की बात कही।
- हरिद्वार से चुनावी राजनीति में सक्रिय होने की इच्छा के संकेत दिए।
- पीएस जीना मामले में आरोपों का खुद जवाब देने की बात कही।
- अपने ऊपर लगाए गए कथित ‘कलंक’ से मुक्त होने की बात कही।
- अपने कार्यकाल में 42 हजार से अधिक नियुक्तियां देने का दावा किया।
- भर्ती बोर्ड और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का उल्लेख किया।
- भर्ती प्रक्रियाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं करने के निर्देश देने की बात कही।
- उत्तराखंड के लिए अलग विकास मॉडल की जरूरत पर जोर दिया।
नोट: इस खबर में हरीश रावत के बयान और दावे उनके कथन के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। नियुक्तियों की संख्या, भर्ती प्रक्रियाओं तथा पीएस जीना से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान आवश्यक होंगे।
