हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित काठगोदाम में गौला नदी पर बने महत्वपूर्ण पुल की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता गहरा गई है। पुल के पिलरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए चेक डैम के कंक्रीट ब्लॉक पहली ही तेज बारिश में बहने लगे हैं। गौला नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण कटाव का खतरा भी बढ़ गया है। मामले की जानकारी मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने का आश्वासन दिया है।

 

पहली तेज बारिश में कमजोर पड़ा सुरक्षा ढांचा

मानसून की शुरुआती तेज बारिश के बाद काठगोदाम स्थित गौला पुल के नीचे पिलरों की सुरक्षा के लिए लगाए गए चेक डैम के कई कंक्रीट ब्लॉक तेज बहाव में बह गए। इससे स्थानीय लोगों में पुल की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती बारिश में ही सुरक्षा संरचना प्रभावित होने लगी है, तो पूरे मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।

एक दिन में 2,650 क्यूसेक बढ़ा जलस्तर

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह गौला नदी का जलस्तर 15,058 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि गुरुवार सुबह यह 12,408 क्यूसेक था। यानी महज 24 घंटे में जलस्तर में करीब 2,650 क्यूसेक की वृद्धि हुई। हालांकि शाम तक जलस्तर घटकर 889 क्यूसेक रह गया, लेकिन सुबह के तेज बहाव ने नदी के कटाव और उसके प्रभाव को स्पष्ट कर दिया।

स्थानीय लोगों ने जताई चिंता

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चेक डैम का निर्माण पुल के पिलरों को तेज बहाव और कटाव से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया गया था। यदि पहली ही बारिश में इसके ब्लॉक बहने लगे हैं, तो आने वाले दिनों में पुल की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग से तत्काल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

2024 में भी हुआ था नुकसान

गौरतलब है कि सितंबर 2024 में भी गौला नदी के तेज बहाव से पुल के किनारे बना सुरक्षा तटबंध (पुस्ता) क्षतिग्रस्त हो गया था। उस घटना के बाद लंबे समय तक मरम्मत कार्य चला था। ऐसे में इस बार मानसून की शुरुआत में ही सामने आई स्थिति ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

कुमाऊं की लाइफलाइन है गौला पुल

गौला पुल कुमाऊं मंडल का एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। यह हल्द्वानी, गौलापार, सितारगंज, टनकपुर, पीलीभीत और पर्वतीय जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल है। बरसात के मौसम में यदि इसकी सुरक्षा प्रभावित होती है, तो हजारों यात्रियों, व्यापारिक गतिविधियों और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

NHAI ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अचल जिंदल ने बताया कि मामले की जानकारी मिल चुकी है और जल्द ही तकनीकी टीम मौके का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा ताकि पुल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान गौला नदी के जलस्तर और कटाव की लगातार निगरानी के साथ-साथ पुल के आसपास बनी सुरक्षा संरचनाओं का नियमित निरीक्षण और समय पर मजबूतीकरण आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी बड़े नुकसान की आशंका से बचा जा सके।

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