देहरादून: केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को देहरादून में आयोजित पांच दिवसीय छठे लोक संवर्धन पर्व का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कौशल और शिल्पकारों के सम्मान का राष्ट्रीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जाति और धर्म से ऊपर उठकर सभी नागरिकों के विकास के लिए कार्य कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पारंपरिक शिल्प, हस्तकला, लोक संस्कृति और अल्पसंख्यक समुदायों के कारीगरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के तहत आयोजित यह महोत्सव शिल्पकारों को विपणन, ब्रांडिंग और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
रिजिजू ने आयोजन में सहयोग के लिए उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस महोत्सव में साझेदारी करने वाला देश का पहला राज्य बना है। उनके अनुसार यह राज्य की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और विकासोन्मुखी सोच को दर्शाता है।
अल्पसंख्यकों को लेकर दिए बयान
अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ परिस्थितियां अलग हैं, जबकि भारत में सरकार योजनाओं और विकास कार्यों के क्रियान्वयन के दौरान धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करती।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे उन अभियानों की भी आलोचना की, जिनमें भारत में अल्पसंख्यकों के असुरक्षित होने का दावा किया जाता है। रिजिजू ने कहा कि कुछ लोग विदेश जाकर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में कभी अल्पसंख्यक होने के कारण किसी प्रकार का भेदभाव महसूस नहीं किया।
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में हज यात्रा व्यवस्था में किए गए सुधारों का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि सिख युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए गए हैं और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी केंद्र सरकार कार्य कर रही है।
