DSAT Scholarship Ad

देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून स्थित प्रेमनगर क्षेत्र के बिधोली गांव में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक दंपती को आतंकवादी हमले में फंसाने का डर दिखाया। आरोपियों ने दंपती से जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में 45.85 लाख रुपये जमा करा लिए। पीड़ितों की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें लगातार फोन और वीडियो कॉल पर संपर्क में रखा। एक वीडियो कॉल करीब 60 घंटे तक चलती रही।

आतंकी हमले में फंसाने की धमकी देकर बनाया दबाव

शिकायत के अनुसार, विजयपाल धीमान और उनकी पत्नी पुष्पा धीमान को 16 अगस्त के आसपास अज्ञात लोगों के फोन आने शुरू हुए। फोन करने वालों ने खुद को मुंबई स्थित ATS मुख्यालय और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। इनमें से एक ने अपना नाम सब-इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया।

आरोपियों ने दावा किया कि दंपती के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में किया गया है और इस मामले में उनकी जांच की जा रही है। इसके बाद उन्हें कार्रवाई का डर दिखाया गया। ठगों ने दंपती के तीनों बच्चों की जानकारी लेकर उनकी सुरक्षा को लेकर भी धमकाया। इससे दंपती मानसिक दबाव में आ गए और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे।

किसी से संपर्क नहीं करने दिया, 60 घंटे तक जारी रही वीडियो कॉल

पीड़ितों ने अपनी शिकायत में बताया कि ठगों ने उन्हें फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए लगातार अपने संपर्क में रखा। उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान दंपती ने डर के कारण परिवार के अन्य सदस्यों को भी मामले की जानकारी नहीं दी।

आरोपियों ने जांच का हवाला देते हुए दंपती से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के खाते में पैसे जमा कराने को कहा। गिरफ्तारी और बच्चों को नुकसान पहुंचने के डर से दंपती ने उनकी बातों पर भरोसा कर लिया और रकम ट्रांसफर करते रहे।

पांच लेनदेन में पांच खातों में जमा किए 45.85 लाख रुपये

शिकायत के मुताबिक, दंपती ने 21 से 27 अगस्त के बीच पांच बार में कुल 45.85 लाख रुपये जमा किए। इनमें चार लेनदेन RTGS के माध्यम से किए गए, जबकि एक बार बैंक शाखा में नकद रकम जमा कराई गई।

शिकायत में दिए गए विवरण के अनुसार, सनातन ट्रेडर्स के नाम से जुड़े खाते में 15 लाख रुपये, प्रागज्योतिष एंटरप्राइजेज में 11.35 लाख रुपये, इंटीमेटेक्स प्राइवेट लिमिटेड में 11.50 लाख रुपये, शांबा मुराम के नाम पर पांच लाख रुपये और आदित्य संदीप महाराज के नाम से जुड़े खाते में तीन लाख रुपये जमा किए गए।

आरोप है कि इतनी बड़ी रकम लेने के बाद भी ठगों ने दंपती पर दबाव बनाना बंद नहीं किया। उन्होंने जमीन बेचकर और पैसे देने के लिए भी कहा।

बेटी ने पूछताछ की तो काट दी वीडियो कॉल

तीन अक्टूबर को दंपती की बेटी अचानक घर पहुंची। उसने अपने माता-पिता को लंबे समय से वीडियो कॉल पर बातचीत करते देखा तो उनसे पूछताछ की। इस पर दंपती घबरा गए और उन्होंने कॉल काट दी। इसके बाद आरोपियों की ओर से कोई फोन नहीं आया।

दंपती ने आठ अक्टूबर को पुलिस से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने, संदिग्ध लेनदेन की जांच करने, आरोपियों की पहचान करने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

क्या है डिजिटल अरेस्ट का तरीका?

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इसके बाद जांच या सत्यापन के नाम पर उनसे पैसे जमा कराए जाते हैं।

किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करके इस तरह पैसे जमा कराने की मांग को गंभीर धोखाधड़ी का संकेत मानना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

By

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *