हरिद्वार: बिहार के बाद अब हरिद्वार में भी मखाने की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने जनपद में मखाने की खेती का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। शुरुआती चरण में करीब 120 बीघा जमीन पर मखाने की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत किसानों को खेती की लागत पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
हरिद्वार जिले में किसान मुख्य रूप से गन्ना, धान और गेहूं की खेती पर निर्भर हैं। सीमित फसलों पर निर्भरता के चलते किसानों की आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में जिला प्रशासन और उद्यान विभाग की ओर से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नई और अधिक लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में मखाने की खेती को भी योजना में शामिल किया गया है।

एक हेक्टेयर पर 1.31 लाख रुपये आएगा खर्च
उद्यान विभाग के अनुसार, एक हेक्टेयर जमीन पर मखाने की खेती करने में करीब 1.31 लाख रुपये की लागत आएगी। इसमें 40 प्रतिशत अनुदान के तहत किसानों को करीब 52,400 रुपये की सहायता दी जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए एक किसान अधिकतम एक हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती कर सकेगा।
मखाने की खेती के लिए सिर्फ तालाब ही नहीं, बल्कि खेतों को तालाबनुमा बनाकर भी इसका उत्पादन किया जा सकेगा। विभाग की ओर से किसानों को खेती की तकनीक और उत्पादन की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी कराया जा रहा है।
बिहार भेजकर कराया गया तीन दिवसीय प्रशिक्षण
मखाने की खेती को लेकर किसानों के एक दल को बिहार के सहरसा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, अगवानपुर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए भेजा जा चुका है। प्रशिक्षण में किसानों को मखाने की खेती, उत्पादन और इससे जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
विभाग का उद्देश्य सिर्फ मखाने का उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों को इसके मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित करना है। किसान मखाने से नमकीन, लड्डू, खीर, पाउडर और मखाना मिश्रित आटा जैसे उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
नवंबर-दिसंबर में होगा किसानों का चयन
मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार डा. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए मखाने की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को मखाने से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए भी दक्ष किया जा रहा है, ताकि महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकें।
मुख्य उद्यान अधिकारी हरिद्वार तेजपाल सिंह ने बताया कि मखाने की खेती के लिए किसानों का चयन शुरू कर दिया गया है। नवंबर और दिसंबर में चयन प्रक्रिया पूरी कर खेती शुरू कराई जाएगी। यदि जनपद में मखाने की खेती का प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में इसका उत्पादन व्यापक स्तर पर कराया जाएगा।

