देहरादून: एटीएस कॉलोनी से जुड़े विवादों में जिला बदर किए गए बिल्डर पुनीत अग्रवाल को कमिश्नर कोर्ट से फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। जिला बदर के आदेश को निरस्त करने और उस पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। दस्तावेजों के अवलोकन के बाद ही मामले में अगला निर्णय लिया जाएगा।

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गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने मई में पुनीत अग्रवाल को उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत छह माह के लिए जिला बदर करने का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही बच्चों पर कथित रूप से लाइसेंसी पिस्टल लहराने के मामले में उनका शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया था।

प्रशासन के अनुसार, 13 अप्रैल को सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में डीआरडीओ से जुड़े एक परिवार के साथ कथित मारपीट की घटना में परिवार के एक सदस्य का कान का पर्दा फट गया था। शिकायत में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्र व्यवहार के भी आरोप लगाए गए थे।

इसके अलावा वर्ष 2025 में दीपावली के दौरान कॉलोनी में बच्चों पर कथित रूप से लाइसेंसी पिस्टल लहराने का मामला भी सामने आया था। इस प्रकरण का जिला प्रशासन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले शस्त्र लाइसेंस निलंबित किया और बाद में उसे निरस्त कर दिया।

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, पुनीत अग्रवाल के विरुद्ध डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक से मारपीट, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को धमकाने, नशे की हालत में उत्पात मचाने, बच्चों पर पिस्टल तानने, गाली-गलौज, वाहन से टक्कर मारने का प्रयास तथा जमीन पर कब्जे के आरोपों सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में पांच आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

सुनवाई के दौरान पुनीत अग्रवाल की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उनके छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं और जिला बदर के कारण उनके आने-जाने तथा देखभाल में कठिनाई हो रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी वृद्ध मां की देखभाल के लिए उनकी उपस्थिति आवश्यक है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि उनके विरुद्ध दर्ज कुछ पुराने मुकदमे समाप्त या खारिज हो चुके हैं, इसलिए उन्हें राहत प्रदान की जानी चाहिए।

फिलहाल कमिश्नर कोर्ट ने मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। कोर्ट ने सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिनके परीक्षण के बाद आगे की सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा.

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