देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रमुख वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (PCCF HoFF) के पद पर नए अधिकारी की नियुक्ति को लेकर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक संपन्न हो चुकी है। माना जा रहा है कि वरिष्ठता के आधार पर 1993 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी कपिल लाल को विभाग की कमान सौंपी जा सकती है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में आयोजित डीपीसी बैठक में प्रमुख सचिव वन, वर्तमान पीसीसीएफ हॉफ रंजन कुमार मिश्र तथा भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ हॉफ भी शामिल रहे। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों कपिल लाल, नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि के नामों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस बार वरिष्ठता के सिद्धांत को प्राथमिकता देने के पक्ष में है। ऐसे में सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण कपिल लाल का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। कपिल लाल और नीना ग्रेवाल 1993 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं, जबकि एसपी सुबुद्धि 1994 बैच से संबंधित हैं।

कपिल लाल को विभाग में एक सख्त, अनुभवी और प्रशासनिक रूप से दक्ष अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की विभागीय जांच या शिकायत लंबित नहीं है, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है। पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि वह केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं, लेकिन डीपीसी में उनके नाम पर बनी सहमति के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है।

यदि कपिल लाल को पीसीसीएफ हॉफ की जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो उन्हें लंबा कार्यकाल मिलेगा। उनका सेवा कार्यकाल वर्ष 2031 तक है, जिससे उन्हें विभाग में दीर्घकालिक योजनाओं और सुधारों को लागू करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

वर्तमान वन प्रमुख रंजन कुमार मिश्र 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि 1 जुलाई से कपिल लाल उत्तराखंड वन विभाग के नए मुखिया के रूप में कार्यभार संभाल सकते हैं।

विभाग में बदलाव केवल शीर्ष पद तक सीमित नहीं रहने वाला है। वन्यजीव, कैंपा, नियोजन और वन पंचायत जैसे महत्वपूर्ण प्रभारों को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। वर्तमान में कपिल लाल कैंपा और नियोजन का दायित्व संभाल रहे हैं, जबकि पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ का महत्वपूर्ण पद भी जल्द रिक्त होने जा रहा है।

इस पद के लिए वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी नीना ग्रेवाल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वर्तमान में वह राज्य प्रतिनियुक्ति पर वन विकास निगम की प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वहीं एसपी सुबुद्धि भी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के दावेदार माने जा रहे हैं।

नई नियुक्तियों के बाद विभाग में अन्य पदों और जिम्मेदारियों में भी व्यापक फेरबदल होने की संभावना है। केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पूरी कर लौटे बी.के. गांगटे को भी अब तक कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि उन्हें विभाग में किसी अहम पद पर तैनाती दी जा सकती है।

इसके साथ ही फील्ड स्तर पर भी बड़े पैमाने पर तबादलों की तैयारी चल रही है। अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर विभागीय स्तर पर प्रारंभिक तैयारी पहले ही पूरी की जा चुकी है। हालांकि सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया फिलहाल लंबित है। अब नए वन प्रमुख के कार्यभार संभालने के बाद तबादला सूची पर दोबारा विचार किया जाएगा और उनकी प्राथमिकताओं के अनुसार विभागीय ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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