देशभर में सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का एक अलग तरह का अभियान चर्चा में है। अपने अजीब नाम के बावजूद यह पहल गंभीर मुद्दों—जैसे बेरोजगारी और भ्रष्टाचार—को व्यंग्य के जरिए उठाने का काम कर रही है।

विवादित बयान से शुरू हुआ ट्रेंड
इस ट्रेंड की शुरुआत CJI Surya Kant के एक कथित बयान के बाद हुई, जिसमें बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह टिप्पणी फर्जी डिग्री रखने वालों के लिए थी, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर इसका व्यापक असर दिखने लगा था।
कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि डिजिटल आंदोलन
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ असल में कोई पंजीकृत राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक मूवमेंट है। इसका मकसद युवाओं के मुद्दों—जैसे रोजगार की कमी, परीक्षा घोटाले और सिस्टम में भ्रष्टाचार—को सामने लाना है।
कम समय में ही इस अभियान ने लाखों लोगों को जोड़ लिया है, जिससे यह एक बड़े डिजिटल विरोध के रूप में उभर रहा है।
किसने शुरू किया यह अभियान?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत Abhijeet Dipke ने की। वे पहले आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया से जुड़े रहे हैं। इस अभियान में मीम्स और सोशल मीडिया कंटेंट के जरिए व्यवस्था पर कटाक्ष किया जा रहा है।
सदस्यता भी व्यंग्यात्मक
इस मूवमेंट में शामिल होने के लिए मजाकिया ‘योग्यता’ भी तय की गई है—जैसे बेरोजगार होना और लंबे समय तक ऑनलाइन रहना। समर्थकों को ‘कॉकरोच’ कहकर संबोधित किया जाता है, जो विरोध का प्रतीक बन गया है।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा
इस अभियान को कुछ राजनीतिक चेहरों का समर्थन भी मिला है। Mahua Moitra और Kirti Azad जैसे नेताओं द्वारा इसके सोशल मीडिया पेज को फॉलो करने से इसकी पहुंच और बढ़ी है।
