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 स्नातक प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। एसबीएस डिग्री कॉलेज में बीए, बीएससी और बीकॉम के छात्रों को अब सात से आठ विषयों की लिखित परीक्षा देने के बजाय केवल चार पेपर देने होंगे। शेष विषयों में विद्यार्थियों का मूल्यांकन आंतरिक परीक्षा, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट के माध्यम से किया जाएगा।

महाविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, नई व्यवस्था में तीन विषय डिसिप्लिन स्पेसिफिक कोर्स (डीएससी) यानी मेजर और एक विषय जनरल इलेक्टिव (जीई) यानी माइनर के अंतर्गत आएगा। इन चार विषयों की लिखित परीक्षा होगी, जबकि अन्य विषयों के लिए आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

असाइनमेंट और प्रोजेक्ट को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर अपने असाइनमेंट और प्रोजेक्ट जमा करने होंगे। लिखित परीक्षाओं की संख्या कम होने से छात्रों को मुख्य विषयों की तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा। हालांकि, अन्य विषयों में भी अंक हासिल करने के लिए आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया में गंभीरता से भाग लेना जरूरी होगा।

पहले अधिक विषयों की लिखित परीक्षाओं के कारण विद्यार्थियों को सीमित समय में कई विषयों की तैयारी करनी पड़ती थी। अब परीक्षा का दबाव कम होने से छात्र अपनी पढ़ाई को बेहतर ढंग से व्यवस्थित कर सकेंगे।

प्राचार्य ने विद्यार्थियों को दी सलाह

एसबीएस डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि नई परीक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए राहत देने वाली है। चार विषयों की लिखित परीक्षा होने से उन्हें मुख्य विषयों की तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा। उन्होंने छात्रों से आंतरिक मूल्यांकन, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट से संबंधित निर्देशों का पालन करने की अपील की।

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