देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। राज्य में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि विधानसभा चुनाव तय समय से पहले, यानी वर्ष 2026 के अंत में कराए जा सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी या तैयारी नहीं है।

गुरुवार को देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से समय से पहले चुनाव कराए जाने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को इस संबंध में किसी भी स्तर पर कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को न तो समय से पहले चुनाव कराने का कोई संकेत मिला है और न ही इस दिशा में किसी प्रकार की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव कराने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है और आयोग जो भी निर्णय करेगा, उसका सभी को पालन करना होगा। फिलहाल समय से पहले चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक स्थिति नहीं है।

क्यों उठ रही हैं समय से पहले चुनाव की चर्चाएं?

दरअसल, उत्तराखंड की वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 23 मार्च 2027 तक है। ऐसे में सामान्य परिस्थितियों में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने की संभावना है। लेकिन हाल के महीनों में भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के लगातार उत्तराखंड दौरे, राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ोतरी और संगठनात्मक बैठकों ने चुनावी माहौल को तेज कर दिया है।

इसके साथ ही मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR), जनवरी 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार कुंभ और उसके बाद होने वाली जनगणना जैसी प्रक्रियाओं को देखते हुए राजनीतिक हलकों में चुनावी कार्यक्रम में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थीं।

सीएम के बयान से साफ हुआ रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल राज्य में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने को लेकर कोई आधिकारिक योजना नहीं है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं और कयासों पर फिलहाल विराम लग गया है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की आगामी तैयारियों और आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी रहेंगी।

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