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 उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खलिया बुग्याल में बिना अनुमति टेंट लगाकर पर्यटकों को ठहराने का मामला सामने आया है। प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए पहचान रखने वाले इस बुग्याल में निर्धारित सीमा से अधिक टेंट लगाए जाने का खुलासा हुआ है। वन विभाग की टीम ने मौके पर जांच के दौरान कुल 30 टेंट पाए, जिनमें से 18 टेंट बिना अनुमति लगाए गए थे। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए सात टूर ऑपरेटरों के चालान किए और अवैध रूप से लगाए गए टेंट हटवा दिए। अब संबंधित ऑपरेटरों पर जुर्माना निर्धारित कर वसूली की जाएगी। जुर्माना जमा नहीं करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

निर्धारित सीमा से अधिक टेंट लगाने का मामला आया सामने

मुनस्यारी का खलिया बुग्याल उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां की हरी-भरी ढलानें, प्राकृतिक नजारे और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। खासकर ट्रैकिंग और प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पर्यटकों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था के लिए टेंट लगाए जाते हैं, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है।

नियमों के अनुसार, खलिया बुग्याल में अधिकतम 12 टेंट लगाए जा सकते हैं। इसके लिए संबंधित टूर ऑपरेटरों को वन विभाग से अनुमति लेनी होती है और निर्धारित शुल्क भी जमा करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त बुग्याल क्षेत्र में पक्के निर्माण की अनुमति नहीं है, ताकि यहां के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

इसके बावजूद कुछ टूर ऑपरेटरों ने कथित तौर पर बिना अनुमति 18 अतिरिक्त टेंट लगा दिए। इन टेंटों में पर्यटकों को ठहराया जा रहा था। मामले की जानकारी वन विभाग तक पहुंचने के बाद टीम ने खलिया बुग्याल पहुंचकर जांच की। मौके पर कुल 30 टेंट मिलने से निर्धारित सीमा से अधिक टेंट लगाए जाने की पुष्टि हुई।

सात टूर ऑपरेटरों के चालान, अवैध टेंट हटाए गए

वन विभाग की टीम ने जांच के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले सात टूर ऑपरेटरों के चालान किए। साथ ही बिना अनुमति लगाए गए टेंट हटाने की कार्रवाई भी की गई। विभाग अब संबंधित ऑपरेटरों पर जुर्माने की राशि निर्धारित करने में जुटा है।

वन विभाग के अनुसार, नियमों के तहत टेंट लगाने के लिए अनुमति और शुल्क संबंधी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। ऐसे में बिना अनुमति कैंपिंग की व्यवस्था करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यदि संबंधित टूर ऑपरेटर निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

इस कार्रवाई के बाद खलिया बुग्याल में पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित करने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

जैव विविधता का खजाना है खलिया बुग्याल

खलिया बुग्याल केवल पर्यटन की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है। यहां बुरांश और भोजपत्र जैसी वनस्पतियां पाई जाती हैं। इसके अलावा राज्य पक्षी मोनाल समेत विभिन्न पक्षियों और वन्यजीवों की मौजूदगी इस क्षेत्र के प्राकृतिक महत्व को बढ़ाती है।

बुग्याल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। यहां जमीन की खुदाई, अनियंत्रित कैंपिंग और नियमों के विपरीत गतिविधियां पर्यावरण को प्रभावित कर सकती हैं। इसी कारण टेंट लगाने और पर्यटकों के ठहरने के लिए सीमाएं निर्धारित की गई हैं।

पर्यटन से स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के अवसर मिलते हैं, लेकिन इन गतिविधियों का संचालन पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप होना भी जरूरी है। खलिया बुग्याल में सामने आया मामला इसी संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

जमीन खोदकर टेंट लगाने पर जताई चिंता

मुनस्यारी की मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मसक्तू ने खलिया बुग्याल में हो रही गतिविधियों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि खलिया बुग्याल जैव विविधता का खजाना है और पर्यावरण की दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। ऐसे क्षेत्र में जमीन खोदकर टेंट लगाने जैसी गतिविधियों से प्राकृतिक स्थल को नुकसान पहुंच सकता है।

धर्मसक्तू ने यह भी कहा कि खलिया बुग्याल से जुड़ा क्षेत्र मुनस्यारी के पेयजल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां से मुनस्यारी के स्थानीय निवासियों और क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की प्यास बुझाने के लिए पेयजल योजना संचालित होती है। ऐसे में प्राकृतिक जल स्रोतों के दूषित होने की आशंका गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने अपने निजी लाभ के लिए बुग्याल को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि पर्यावरण की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए नियमों का प्रभावी पालन जरूरी है।

वन विभाग ने क्या कहा?

वन विभाग की एसडीओ नेहा सौन ने बताया कि खलिया बुग्याल में जांच के दौरान कुल 30 टेंट पाए गए। निर्धारित व्यवस्था के तहत यहां केवल 12 टेंट लगाए जा सकते हैं। इस तरह 18 टेंट बिना अनुमति लगाए गए थे।

उन्होंने बताया कि संबंधित सात टूर ऑपरेटरों के चालान किए गए हैं। अब उनके खिलाफ जुर्माने का आकलन किया जाएगा और नियमानुसार वसूली की जाएगी। यदि ऑपरेटर जुर्माना जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन जरूरी

खलिया बुग्याल में अवैध टेंट लगाए जाने का मामला पर्यटन स्थलों पर नियमों के पालन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जरूरत को सामने लाता है। एक ओर पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील बुग्यालों की प्राकृतिक सुंदरता, वनस्पतियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।

अब वन विभाग की कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित टूर ऑपरेटरों से जुर्माने की वसूली किस तरह की जाती है और भविष्य में बिना अनुमति कैंपिंग रोकने के लिए निगरानी कितनी प्रभावी रहती है।

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