हरिद्वार: सिडकुल थाना क्षेत्र से किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में आरोपी को खुद को नाबालिग साबित करने की कोशिश भारी पड़ गई। आरोपी और उसके परिजनों ने पुलिस जांच के दौरान आठवीं कक्षा की कथित ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) पेश की थी, जिसमें आरोपी की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम बताई गई थी। जांच में यह टीसी फर्जी निकली। इसके बाद पुलिस ने फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने के मामले में अलग से प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, छह अगस्त 2026 को सिडकुल थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में विद्यालय की टीसी के आधार पर किशोरी की जन्मतिथि 21 जुलाई 2009 सामने आई, जिससे उसके नाबालिग होने की पुष्टि हुई। इसके बाद 12 अगस्त को गुमशुदगी के मामले को अपहरण की धाराओं में तरमीम कर पुलिस ने जांच शुरू की।
किशोरी की बरामदगी के बाद POCSO की धाराएं बढ़ीं
पुलिस ने किशोरी को बरामद करने के बाद उसके बयानों के आधार पर मामले में पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराएं बढ़ा दीं। जांच के दौरान सीताबपुरी, मुजफ्फरनगर निवासी विशाल का नाम सामने आया।
इसके बाद विशाल के परिजनों ने सनबीम इंटर कॉलेज, अब्दुल्लापुर, मेरठ की कक्षा आठ की कथित टीसी की छायाप्रति पुलिस को उपलब्ध कराई। इस दस्तावेज में विशाल की उम्र 18 वर्ष से कम दर्शाई गई थी। इसी आधार पर विशाल ने किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
पुलिस ने पांच सितंबर को उसे न्यायिक सुरक्षा अभिरक्षा में प्लेस ऑफ सेफ्टी भेज दिया था।
विद्यालय ने टीसी को बताया फर्जी
मामले की विवेचक मनीषा नेगी ने आरोपी की पेश की गई टीसी को संबंधित विद्यालय से सत्यापित कराया। विद्यालय की ओर से पुलिस को लिखित जवाब दिया गया कि उक्त टीसी उनके संस्थान की नहीं है और इसे फर्जी बताया गया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की शैक्षिक जानकारी स्वामी कल्याणदेव इंटरमीडिएट कॉलेज, मोरना से सत्यापित कराई। वहां उपलब्ध दसवीं की अंकतालिका में विशाल की जन्मतिथि 15 मार्च 2008 दर्ज मिली।
दसवीं की अंकतालिका से सामने आई असली उम्र
दसवीं की अंकतालिका और प्रधानाचार्य के बयान के आधार पर पुलिस के सामने यह तथ्य आया कि घटना के समय विशाल की उम्र 18 वर्ष थी। इसके बाद उसे प्लेस ऑफ सेफ्टी से पॉक्सो कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध है।
सीओ सदर सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फर्जी टीसी तैयार करने और उपलब्ध कराने के मामले में अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की आगे जांच की जा रही है।

