नई दिल्ली: भारत सरकार वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना को पूरी तरह डिजिटल प्रारूप में आयोजित करने जा रही है। इस बार जनगणना की संपूर्ण प्रक्रिया ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS)’ के माध्यम से संचालित और मॉनिटर की जाएगी, जिससे रियल टाइम ट्रैकिंग संभव होगी।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश जारी करते हुए बताया कि जनगणना में डेटा संग्रहण से लेकर उसके विश्लेषण तक हर चरण में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।

मोबाइल ऐप और जियो-टैगिंग से डेटा संग्रह

इस बार पारंपरिक कागजी फॉर्म की जगह मोबाइल एप्लिकेशन और हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग किया जाएगा। हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (HLB) और एन्यूमरेशन ब्लॉक (EB) की सटीक पहचान के लिए जियो-टैगिंग और वेब-आधारित मैपिंग सिस्टम अपनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि 6 लाख से अधिक जीआईएस नक्शे पहले ही पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं।

32 लाख से अधिक कर्मियों की भागीदारी

देशव्यापी इस अभियान में लगभग 32 लाख फील्ड कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे स्वयं ऑनलाइन अपने विवरण दर्ज कर सकेंगे।

दो चरणों में आयोजन

जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न होगी—

  • पहला चरण: हाउस लिस्टिंग और आवास संबंधी विवरण (अप्रैल–सितंबर 2026)

  • दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)

लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में ही की जाएगी।

रोजगार और तकनीकी अवसर

जनगणना कार्यों के लिए करीब 18,600 तकनीकी विशेषज्ञों को लगभग 550 दिनों के लिए लगाया जाएगा, जिससे लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। डिजिटल डेटा प्रबंधन का अनुभव इन कर्मियों के लिए भविष्य में भी लाभकारी साबित होगा।

11,718.24 करोड़ रुपये का बजट

केंद्रीय कैबिनेट ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास माना जाता है।

जाति आधारित आंकड़े भी जुटाए जाएंगे

जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में जाति संबंधी आंकड़े भी डिजिटल माध्यम से एकत्र किए जाएंगे, जिससे सामाजिक और जनसांख्यिकीय विश्लेषण को व्यापक आधार मिलेगा।

16वीं राष्ट्रीय जनगणना

जनगणना 2027 देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। यह गांव, शहर और वार्ड स्तर पर सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों का विस्तृत डाटाबेस उपलब्ध कराएगी, जो भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना स्थगित हुई थी, लेकिन 2027 में इसे आधुनिक डिजिटल स्वरूप में लागू कर भारत एक नई प्रशासनिक मिसाल स्थापित करने की तैयारी में है।

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