
इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में पोल्ट्री उत्पादन बढ़ाने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। नीति के तहत लेयर फार्म और ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित करने के लिए अलग-अलग परियोजना लागत और अनुदान की सीमा निर्धारित की गई है।
लेयर फार्म पर कितना मिलेगा अनुदान?
कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में अलग-अलग क्षमता के व्यावसायिक लेयर फार्म स्थापित किए जा सकते हैं।
- मैदानी क्षेत्र: 30 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म की निर्धारित परियोजना लागत 1.80 करोड़ रुपये है। इस पर अधिकतम 54 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है।
- पर्वतीय क्षेत्र: 15 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म के लिए अधिकतम 48 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है।
लेयर फार्म में मुख्य रूप से अंडा उत्पादन किया जाता है। इस तरह की इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से प्रदेश में अंडा उत्पादन बढ़ाने और बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ब्रायलर पैरेंट फार्म पर 63 लाख तक की सब्सिडी
ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित करने वाले उद्यमियों को भी योजना के तहत वित्तीय सहायता दी जाएगी।
| इकाई का प्रकार | निर्धारित परियोजना लागत | अधिकतम अनुदान |
|---|---|---|
| मैदानी क्षेत्र में 10 हजार पक्षियों का ब्रायलर पैरेंट फार्म | 2.10 करोड़ रुपये | 63 लाख रुपये |
| पर्वतीय क्षेत्र में 5 हजार पक्षियों का ब्रायलर पैरेंट फार्म | 1.40 करोड़ रुपये | 56 लाख रुपये |
ब्रायलर पैरेंट फार्म में मांस उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्रायलर चूजों के उत्पादन से जुड़ा काम किया जाता है। इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलने से पोल्ट्री कारोबार की आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए जमीन होना जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास उत्तराखंड में जमीन का स्वामित्व होना चाहिए। यदि आवेदक के पास अपनी जमीन नहीं है, तो कम से कम 10 वर्ष का पंजीकृत पट्टा समझौता होना अनिवार्य है। जमीन विवादग्रस्त नहीं होनी चाहिए।
इसके अलावा, आवेदन के समय बैंक का सहमति पत्र भी जमा करना होगा। इच्छुक उद्यमियों को परियोजना शुरू करने से पहले भूमि संबंधी दस्तावेज, वित्तीय व्यवस्था और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी।
कौन कर सकता है आवेदन?
कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत आवेदन करने के लिए उत्तराखंड का अधिवासी होना अनिवार्य नहीं है। नीति के अनुसार, भारतीय नागरिक, अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और अन्य देशों के उद्यमी भी निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं।
इसके अलावा, व्यक्तिगत आवेदक, साझेदारी फर्म, कंपनियां और स्टार्टअप भी व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सभी आवेदकों को आवश्यक दस्तावेज और बैंक का सहमति पत्र प्रस्तुत करना होगा।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगी मंजूरी
मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष जोशी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक प्रदेश में कुल 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है। इनमें 26 इकाइयां मैदानी क्षेत्रों और 28 इकाइयां पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि परियोजनाओं को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मंजूरी दी जाएगी। हालांकि, अनुदान की स्वीकृति बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। इसलिए इच्छुक उद्यमियों को आवेदन से पहले पात्रता, जरूरी दस्तावेज और संबंधित वित्तीय शर्तों की जानकारी जुटाने की सलाह दी गई है।
छोटी पोल्ट्री इकाइयों को भी मिलेगा अवसर
नीति के तहत निर्धारित क्षमता से छोटी पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने वाले उद्यमी एमएसएमई नीति के अंतर्गत उपलब्ध लाभों के लिए पात्र हो सकते हैं। इससे छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
इसके अतिरिक्त, पोल्ट्री व्यवसाय में उन्नत तकनीक अपनाने वाले उद्यमियों को नवाचार प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और उत्पादन क्षमता में सुधार को बढ़ावा देना है।
स्वरोजगार और पोल्ट्री उत्पादन बढ़ाने पर जोर
कुक्कुट विकास नीति-2025 के माध्यम से सरकार प्रदेश में व्यावसायिक पोल्ट्री इकाइयों की संख्या बढ़ाने और निवेश के नए अवसर पैदा करने की दिशा में प्रयास कर रही है। मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुदान की व्यवस्था से दोनों क्षेत्रों में पोल्ट्री कारोबार को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य है।
योजना के तहत आवेदन करने के इच्छुक लोगों को संबंधित पशुपालन विभाग से अनुदान की पात्रता, स्वीकृत परियोजना लागत, बजट उपलब्धता और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि करने के बाद ही निवेश संबंधी निर्णय लेना चाहिए।

