लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के इस्तीफे की घोषणा के बाद देश की राजनीति के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हलचल तेज हो गई है। स्टारमर ने सोमवार को अपने पद से हटने का फैसला किया, जिसके बाद निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई और ब्रिटिश मुद्रा पाउंड पर दबाव देखने को मिला।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन और नई सरकार के गठन को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है।
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बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच लिया फैसला
कीर स्टारमर पिछले कुछ महीनों से अपनी पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और कमजोर राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर दबाव झेल रहे थे। हाल के स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे। आखिरकार उन्होंने पार्टी और प्रधानमंत्री पद दोनों से इस्तीफा देने का फैसला किया।
स्टारमर ने कहा है कि नए नेता के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। लेबर पार्टी में नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इस बीच एंडी बर्नहैम को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
बाजारों में बढ़ी चिंता
प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद निवेशकों की नजर अब ब्रिटेन की अगली सरकार और उसकी आर्थिक नीतियों पर टिकी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नई सरकार सार्वजनिक खर्च बढ़ाने या आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव का संकेत देती है तो इसका असर ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति और उधारी लागत पर पड़ सकता है। इसी कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
नए नेतृत्व पर टिकी निगाहें
ब्रिटेन की राजनीति में यह बदलाव ऐसे समय आया है जब देश पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी का नया नेता कौन होगा और वह देश की अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाने की कोशिश करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नए नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती और सरकार अपनी आर्थिक प्राथमिकताएं सामने नहीं रखती, तब तक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशक और कारोबारी जगत फिलहाल लंदन से आने वाले हर राजनीतिक संकेत पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
