नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और स्पष्ट फैसले में कहा है कि आरक्षित वर्ग (SC, ST, OBC) का कोई भी उम्मीदवार यदि बिना किसी प्रकार की छूट के जनरल कैटेगरी के कटऑफ से अधिक अंक हासिल करता है, तो उसे अनारक्षित (Unreserved) श्रेणी की सीट पर ही चयनित माना जाएगा। अदालत ने इसे लंबे समय से स्थापित कानूनी सिद्धांत करार दिया।

जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में आरक्षित उम्मीदवार को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता, क्योंकि चयन पूरी तरह योग्यता और मेरिट के आधार पर होता है। यदि किसी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया है, तो उसे ‘ओपन कैटेगरी’ का उम्मीदवार माना जाना चाहिए।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अनारक्षित श्रेणी के लिए अधिसूचित सभी 122 पद उम्मीदवारों द्वारा चयन प्रक्रिया में प्राप्त अंकों के आधार पर भरे गए थे। इसलिए चयन प्राधिकरण द्वारा योग्य आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के अनुसार अनारक्षित सूची में स्थान देना पूरी तरह वैध और उचित था।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के वर्ष 2020 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को मेरिट वाले आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को हटाकर एक अनारक्षित उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब अनारक्षित श्रेणी की सभी रिक्तियां पहले ही मेरिट लिस्ट के अनुसार भर दी गई हों, तो किसी अन्य अनारक्षित उम्मीदवार की नियुक्ति का कोई औचित्य नहीं बनता।

अदालत ने यह भी दोहराया कि आरक्षण रोस्टर का उद्देश्य चयन प्रक्रिया चलाना नहीं, बल्कि विभिन्न श्रेणियों में उपलब्ध और रिक्त पदों की संख्या तय करना होता है। ‘अनारक्षित’ श्रेणी किसी वर्ग विशेष का कोटा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से मेरिट पर आधारित एक खुला मंच है, जहां सभी वर्गों के उम्मीदवार समान अवसर के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।

फैसले में कहा गया कि यह “मेरिट आधारित समायोजन” संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर) की भावना के अनुरूप है।

यह विवाद वर्ष 2013 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विस) के 245 पदों पर की गई भर्ती से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया के बाद 122 अनारक्षित पदों को जनरल और आरक्षित श्रेणी के योग्य उम्मीदवारों की संयुक्त मेरिट सूची के आधार पर भरा गया था। इसी प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम और स्पष्ट फैसला सुना दिया है।

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