रुद्रपुर/नैनीताल: नैनीताल जिला प्रशासन में अनुशासनहीनता और सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के दुरुपयोग के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सख्त कार्रवाई की है। डीएम ने स्पष्ट किया कि शासकीय तंत्र में नियम, मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पहले प्रकरण में, नैनीताल राजस्व विभाग में तैनात एक कर्मचारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर अपने स्थानांतरण आदेश का विरोध किया गया। मामले की जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके आधार पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत विभागीय कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी ने कर्मचारी की औपचारिक भर्त्सना करते हुए उसकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियों को दो वर्षों के लिए रोकने के आदेश पारित किए।
दूसरे मामले में, जिलाधिकारी कार्यालय में कार्यरत प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम द्वारा अपने ही कार्यालय से RTI अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अत्यधिक मात्रा में सूचना मांगे जाने और बाद में बिना वैध कारण के उसे प्राप्त करने से इनकार करने का मामला सामने आया। प्रशासन ने इसे शासकीय संसाधनों, समय और श्रम के दुरुपयोग के रूप में गंभीर माना।
प्रशासन के अनुसार, सीमित मानव संसाधनों के बावजूद लगभग तीन हजार पृष्ठों की सूचना कई दिनों की मेहनत से नि:शुल्क तैयार कर उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन सूचना तैयार होने के बाद उसे लेने से इनकार कर दिया गया, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित हुआ। आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि RTI अधिनियम पारदर्शिता सुनिश्चित करने का माध्यम है, न कि प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करने का।
इस प्रकरण में प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम की औपचारिक भर्त्सना की गई, भविष्य के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई तथा प्रशासनिक आधार पर जिला मुख्यालय से उनका स्थानांतरण किया गया। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने दो टूक कहा कि शासकीय सेवकों से उच्च स्तर की जिम्मेदारी, संयम और नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है और आगे भी अनुशासनहीनता या दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
