हरिद्वार। उत्तराखंड में फर्जी आर्म्स लाइसेंस के जरिए हथियार खरीदने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। मोहन सिंह रावत के नाम से मुजफ्फरपुर से जारी बताया गया आर्म्स लाइसेंस जांच में फर्जी निकला है। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने हरिद्वार एसएसपी को भेजी रिपोर्ट में बताया कि ऐसा कोई लाइसेंस जिले से जारी नहीं हुआ।

मुजफ्फरपुर के रिकॉर्ड में नहीं मिला लाइसेंस
जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित लाइसेंस का शस्त्र अभिलेखों में सत्यापन किया, लेकिन कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। यहां तक कि लाइसेंस ओडी पंजी में भी दर्ज नहीं था। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के जरिए लाइसेंस तैयार कर उत्तराखंड में हथियार खरीदने की आशंका और गहरा गई है।
बिहार और यूपी के लाइसेंस भी रडार पर
नगालैंड और पूर्वोत्तर राज्यों से जारी बताए गए संदिग्ध लाइसेंसों में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब बिहार और उत्तर प्रदेश से जारी बताए गए लाइसेंस भी जांच के घेरे में हैं। पुलिस को आशंका है कि फर्जी लाइसेंस और कूटरचित एनओसी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है।
14 गिरफ्तार, 20 हथियार और 372 कारतूस बरामद
उत्तराखंड में इस मामले से जुड़े अब तक चार मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस 14 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। कार्रवाई में 20 अवैध हथियार और 372 कारतूस बरामद हुए हैं।
SIT खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां
SIT अब लाइसेंस से लेकर हथियार खरीद तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है। संदिग्ध लाइसेंस, एनओसी, दस्तावेज और उत्तराखंड के आर्म्स रजिस्टर में हुई प्रविष्टियों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी लाइसेंस किसने तैयार किए और उन्हें उत्तराखंड के रिकॉर्ड में कैसे दर्ज कराया गया।
