देहरादून: उत्तराखंड में पंचायती राज और परिवार रजिस्टर से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। सरकारी आंकड़ों में प्रदेश के कई जिलों में ऐसे हजारों लोग दर्ज हैं, जिनकी उम्र 100 साल से अधिक दिखाई गई है और उन्हें अभी भी जीवित बताया गया है। इनमें एक महिला की उम्र 364 साल और एक व्यक्ति की उम्र 248 साल दर्ज होना सबसे अधिक चौंकाने वाला है।

ये तथ्य राज्य सरकार की देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना के तहत विभिन्न विभागों के आंकड़ों को एक मंच पर लाकर की जा रही जांच के दौरान सामने आए हैं। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से वर्षों से चले आ रहे फर्जी, डुप्लीकेट और त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड को हटाया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे।
डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर सरकार की चिंता
उत्तराखंड में जनसंख्या संरचना में आ रहे बदलाव को लेकर राज्य सरकार लंबे समय से चिंतित है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई बार कहा है कि असामान्य जनसंख्या आंकड़े और सरकारी योजनाओं में गलत लाभार्थी प्रदेश के लिए खतरा बन सकते हैं। इसी वजह से सरकार ने देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना को लागू किया है।
परिवार की स्पष्ट परिभाषा न होने से फैली गड़बड़ी
प्रमुख सचिव (नियोजन) आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, “परिवार” की एक समान और स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण लोग अलग-अलग योजनाओं के लिए अपनी सुविधा के अनुसार परिवार का आकार दर्ज कराते रहे।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में लोग परिवार को छोटा दर्शाते हैं, जबकि राशन कार्ड और खाद्य योजनाओं में अधिक लाभ के लिए परिवार को बड़ा दिखाया जाता है। इसी कारण सरकारी रिकॉर्ड में वर्षों से विसंगतियां बनी रहीं।
पंचायती राज विभाग में सबसे ज्यादा अनियमितताएं
डेटा विश्लेषण में सामने आया कि पंचायती राज विभाग के परिवार रजिस्टर में सबसे ज्यादा गलत प्रविष्टियां हैं। करीब 5,000 लोग ऐसे पाए गए हैं, जिनकी उम्र 100 से 200 साल के बीच दर्ज है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।
एक ग्राम पंचायत अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में शादी के बाद गांव छोड़ चुकी महिलाओं के नाम जानबूझकर परिवार रजिस्टर से नहीं हटाए जाते, ताकि योजनाओं का लाभ मिलता रहे।
जिलावार आंकड़े
– पौड़ी गढ़वाल: 2078
– टिहरी गढ़वाल: 1198
– उधम सिंह नगर: 580
– अल्मोड़ा: 193
– पिथौरागढ़: 99
– चमोली: 64
– बागेश्वर: 56
– नैनीताल: 55
– हरिद्वार: 40
– रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी: 41-41
– चंपावत और देहरादून: 27-27
सबसे चौंकाने वाले मामले
जांच में कुछ बेहद असामान्य प्रविष्टियां सामने आईं—
चमोली की गंगा देवी (364 वर्ष),
उधम सिंह नगर के अजीत नारायण (248 वर्ष),
टिहरी गढ़वाल की रूप देवी (181 वर्ष),
पौड़ी गढ़वाल की चंदा देवी (164 वर्ष)।
इन सभी को रिकॉर्ड में जीवित दर्शाया गया है, जो वास्तविकता से परे है।
अवैध और फर्जी लाभार्थियों की भी होगी पहचान
प्रमुख सचिव के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल उम्र से जुड़ी गलतियों को सुधारना ही नहीं, बल्कि अवैध और अनधिकृत लोगों की पहचान करना भी है। हाल ही में राशन कार्ड सत्यापन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी कार्ड हटाए गए थे। अब इसी तरह अन्य योजनाओं के लाभार्थियों की भी जांच होगी।
कैसे काम करेगी देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना
देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना के तहत राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पंचायत, ग्राम विकास और शहरी निकायों के डेटा को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा रहा है। सत्यापन के बाद हर परिवार को एक यूनिक फैमिली आईडी दी जाएगी, जिससे वे अपने विवरण ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। हर बदलाव का संबंधित विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा।
आधार से लिंक होगी फैमिली आईडी
सरकार की योजना है कि भविष्य में इस फैमिली आईडी को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। इसे कानूनी मान्यता देने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाने की तैयारी की जा रही है। आगे चलकर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ इसी फैमिली आईडी के माध्यम से दिया जाएगा।
सीएम धामी का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि डेमोग्राफी में असंतुलन उत्तराखंड के लिए गंभीर चुनौती है। सरकार किसी भी स्थिति में आने वाली पीढ़ियों को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं देना चाहती और इसके लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या है परिवार रजिस्टर
परिवार रजिस्टर एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज होता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज किया जाता है। यह ग्राम पंचायत या नगर निकाय द्वारा तैयार किया जाता है और सरकारी योजनाओं, पहचान, विरासत और संपत्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
