चमोली/पौड़ी गढ़वाल: चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर शनिवार 11 जनवरी को कांग्रेस समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उत्तराखंड बंद का आह्वान किया। बंद का असर प्रदेश के कई इलाकों में देखने को मिला, जबकि चमोली और पौड़ी जिलों में जनजीवन पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा।

चमोली जिले के गैरसैंण में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण क्षेत्र के व्यापार संघों के साथ-साथ टैक्सी यूनियनों ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए बाजार और यातायात पूरी तरह बंद रखा। गैरसैंण व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट, मेहलचौरी के मोहन सिंह नेगी, माईथान के संजय पुंडीर, आगरचट्टी के विजय रावत, पाण्डुवाखाल के राम सिंह नेगी और नागाचूलाखाल के गोविंद सिंह मटकोटी ने संयुक्त रूप से बाजार बंद की घोषणा की, जिसका असर पूरे क्षेत्र में स्पष्ट रूप से नजर आया।
बंद के समर्थन में रामगंगा टैक्सी यूनियन गैरसैंण के अध्यक्ष मनमोहन परसारा ने बताया कि यूनियन से जुड़ी सभी 150 टैक्सियों का संचालन पूरे दिन ठप रहा।
प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भी इस बंद को समर्थन दिया। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं गढ़वाल प्रभारी सुरेश कुमार बिष्ट ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने के बावजूद पीड़ित परिवार की मांग है कि जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में हो, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बंद पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका एकमात्र उद्देश्य अंकिता भंडारी को शीघ्र न्याय दिलाना है।
चमोली जिले के गोपेश्वर, कर्णप्रयाग और नंदानगर में भी बाजार पूरी तरह बंद रहे, जबकि ज्योतिर्मठ में बंद का आंशिक असर देखने को मिला। जिला मुख्यालय गोपेश्वर में व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध दर्ज कराया। सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक जनदबाव बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।
पौड़ी और श्रीनगर में भी उत्तराखंड बंद का व्यापक असर देखा गया। बंद के चलते सुबह 12 बजे तक बाजार पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। मेडिकल स्टोर खुले रहे, जबकि शराब की दुकानें संचालित होती नजर आईं।
वहीं कोटद्वार में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने व्यापारियों से दुकानों को बंद रखने की अपील की, जिसके चलते कुछ इलाकों में बाजार बंद रहे, जबकि मुख्य क्षेत्रों में गतिविधियां आंशिक रूप से सामान्य रहीं।
इसके विपरीत देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, लक्सर, मसूरी, हल्द्वानी, खटीमा और काशीपुर में बंद का कोई खास असर नजर नहीं आया।
