पंतनगर: जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के किसान मेले में इस बार कृषि और तकनीक से जुड़े कई नए प्रयोग आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड की पहली छिलका रहित जौ की प्रजाति ‘पंत जौ-1121’ विकसित की है। इसके अलावा मोरिंगा-तुलसी से हर्बल कोम्बुचा पेय और आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रिसीजन लाइवस्टॉक फार्मिंग (PLF) ऐप भी तैयार किया गया है। इन नवाचारों को देखने और इनके बारे में जानकारी लेने के लिए किसान मेले में किसानों की भीड़ उमड़ रही है।

मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी बताई जा रही ‘पंत जौ-1121’
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड की पहली छिलका रहित जौ की प्रजाति विकसित की है। ‘पंत जौ-1121’ को बीते अगस्त में भारत सरकार की सेंटर वैरायटी रिलीज कमेटी ने देश के उत्तर-पूर्वी जोन के 12 राज्यों में खेती के लिए जारी किया है।
छिलका रहित जौ की खासियत यह है कि सामान्य जौ की तरह इसके दानों से छिलका हटाने के लिए अतिरिक्त प्रोसेसिंग की जरूरत नहीं पड़ती। वैज्ञानिकों के अनुसार इसे सीधे खाद्य उपयोग में लाया जा सकता है और इससे तैयार रोटी को मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी माना जाता है।
छिलका रहित जौ के प्रजनक एवं कृषि महाविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के प्रमुख डॉ. जेपी जायसवाल और डॉ. स्वाति ने बताया कि सामान्य जौ में छिलका होने के कारण उसे उपयोग से पहले प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है। वहीं, पंत जौ-1121 को सीधे उपयोग में लाया जा सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 20 से 28 के बीच बताई गई है, जबकि गेहूं का GI करीब 60 से 70 बताया गया है। इसमें बीटा ग्लूकन की मात्रा भी अधिक है। इसी वजह से इसे मधुमेह के अनुकूल खाद्य विकल्प के तौर पर विकसित किया गया है।
किसानों में बीज की बढ़ी मांग
किसान मेले में पंत जौ-1121 के बीज की सीमित मात्रा किसानों को उपलब्ध कराई गई है। इसके बाद किसानों में बीज को लेकर मांग बढ़ गई है। विश्वविद्यालय अब इसका बड़े स्तर पर बीज उत्पादन करने की तैयारी कर रहा है, ताकि आगामी किसान मेलों और किसानों की मांग के अनुसार पर्याप्त बीज उपलब्ध कराया जा सके।
पंत जौ-1121 की खासियतें
डॉ. जेपी जायसवाल के अनुसार पंत जौ-1121 की फसल अवधि करीब 125 से 135 दिन है। पौधा मजबूत प्रकृति का है और गिरने के प्रति सहनशील है। यह पीला रतुआ और झुलसा जैसे रोगों के प्रति भी प्रतिरोधी बताया गया है।
इस प्रजाति में आयरन, कैल्शियम, जिंक, मैंगनीज, मैग्नीशियम, कॉपर, सेलेनियम और पोटैशियम जैसे विभिन्न पोषक तत्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें बीटा ग्लूकन की प्रचुरता भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
मोरिंगा-तुलसी से तैयार किया हर्बल कोम्बुचा
किसान मेले में विश्वविद्यालय का एक और नवाचार लोगों का ध्यान खींच रहा है। प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के पोस्ट हार्वेस्ट प्रोसेसिंग एंड फूड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. पीके ओमरे और डॉ. सचिन कुमार के मार्गदर्शन में एमटेक छात्र शिवांक भारद्वाज ने मोरिंगा-तुलसी कोम्बुचा नाम से एक फर्मेंटेड हर्बल पेय तैयार किया है।
शिवांक के अनुसार यह पेय मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियों, तुलसी, चाय, चीनी और SCOBY (बैक्टीरिया और यीस्ट की सहजीवी संस्कृति) की मदद से किण्वन प्रक्रिया के जरिए तैयार किया जाता है।
मोरिंगा और तुलसी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पौध-आधारित जैव सक्रिय यौगिकों को फर्मेंटेशन तकनीक से जोड़कर इस नए पेय को विकसित किया गया है।
सामान्य मीठे पेय का हर्बल विकल्प
शिवांक ने बताया कि इस उत्पाद को सामान्य मीठे पेय और कार्बोनेटेड शीतल पेय के मुकाबले एक हर्बल और फर्मेंटेड विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके पोषण, गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वीकार्यता को लेकर आगे परीक्षण किए जा सकते हैं।
यह नवाचार पारंपरिक भारतीय वनस्पतियों को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीक से जोड़ने और कृषि आधारित सामग्री का मूल्य संवर्धन करने की संभावनाओं को दर्शाता है।
पशुपालन को स्मार्ट बनाएगा Precision Livestock Farming ऐप
किसानों के लिए पशुपालन को अधिक वैज्ञानिक और डेटा आधारित बनाने की दिशा में भी विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने पहल की है। प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के शोधार्थियों ने विभागाध्यक्ष डॉ. एसडी सामंतरे के मार्गदर्शन में प्रिसीजन लाइवस्टॉक फार्मिंग (PLF) ऐप विकसित किया है।
इस तकनीक में सेंसर, सटीक डेटा और डिजिटल टूल्स की

