एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के नामांकन में जमकर हंगामा, रैली रोकने पर पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं में टकराव; 29 सितंबर को होगा मतदान

हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के नामांकन के दौरान शुक्रवार को माहौल उस समय गरमा गया, जब रैली निकालने को लेकर पुलिस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हो गया। कॉलेज के बाहर नैनीताल रोड पर छात्र संगठनों और प्रत्याशियों ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। इसी दौरान एनएसयूआई की रैली को आगे बढ़ने से रोकने पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठियां भी फटकारीं।

नामांकन के दौरान एबीवीपी, एनएसयूआई और निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थक बड़ी संख्या में कॉलेज के आसपास पहुंचे थे। ढोल-नगाड़ों और नारेबाजी के बीच समर्थकों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। पुलिस पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट थी, क्योंकि चुनाव से पहले प्रत्याशियों को रैली, बाहरी लोगों की मौजूदगी और नियमों के उल्लंघन को लेकर निर्देश दिए गए थे।

एनएसयूआई की रैली रोकने पर बढ़ा विवाद

नामांकन प्रक्रिया के दौरान अध्यक्ष पद के दावेदारों की ओर से कॉलेज के बाहर नैनीताल रोड पर रैलियां निकाली जा रही थीं। इसी दौरान एनएसयूआई की रैली जब तीसरे चक्कर के लिए कॉलेज गेट से नैनीताल रोड की ओर बढ़ने लगी तो पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया।

पुलिस की ओर से रैली को आगे नहीं बढ़ाने के लिए कहा गया। इसी बात को लेकर छात्र नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला धक्कामुक्की तक पहुंच गया।

मौके पर मौजूद एक कार्यकर्ता की पुलिस अधिकारी से तीखी नोकझोंक भी हुई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठियां फटकारीं। कुछ देर बाद जब कार्यकर्ताओं ने दोबारा आगे बढ़ने का प्रयास किया तो पुलिस ने फिर लाठियां फटकारकर उन्हें पीछे किया।

NSUI ने लगाया भेदभाव का आरोप

घटना के बाद एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि एबीवीपी, निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों के समर्थकों को रैली निकालने की अनुमति दी गई, जबकि उनकी रैली को रोक दिया गया।

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि सभी प्रत्याशियों को रैली निकालने की अनुमति दी जा रही थी तो उनके समर्थकों को बार-बार क्यों रोका गया। इसको लेकर कॉलेज गेट के बाहर काफी देर तक हंगामा और नारेबाजी होती रही।

हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा।

पुलिस का क्या कहना है?

एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल के अनुसार सभी प्रत्याशियों की रैलियों को निकलने दिया गया था। पुलिस का कहना था कि कुछ कार्यकर्ता बार-बार चक्कर लगा रहे थे, इसलिए उन्हें रुकने का अनुरोध किया गया।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन करने और माहौल खराब करने वालों को चिह्नित किया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी पुलिस-प्रशासन ने प्रत्याशियों को लिंगदोह समिति के नियमों का पालन करने और बिना अनुमति रैली या ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं करने की हिदायत दी थी।

पहले से पुलिस ने कर रखी थी तैयारी

एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर पुलिस प्रशासन पहले से ही सतर्क था। 25 सितंबर को एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था और पुलिस अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान माहौल खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

प्रशासन की ओर से पहले ही यह तय किया गया था कि कॉलेज परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं होगा और छात्रों को पहचान पत्र के साथ प्रवेश दिया जाएगा। रैलियों और प्रचार के दौरान भी नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे।

सड़क पर दिखा शक्ति प्रदर्शन

नामांकन के दिन एमबीपीजी कॉलेज के बाहर नैनीताल रोड पर छात्र राजनीति का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। अलग-अलग प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने काफिले के साथ पहुंचे। ढोल-नगाड़ों, नारों और समर्थकों की भीड़ के बीच प्रत्याशियों ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की।

हालांकि, रैलियों के कारण सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस को भीड़ और यातायात व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी। हालिया रिपोर्टों में भी चुनावी रैलियों के दौरान नैनीताल रोड पर यातायात प्रभावित होने और पुलिस द्वारा नियमों के पालन की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है।

अध्यक्ष पद पर मुकाबला हुआ दिलचस्प

एमबीपीजी कॉलेज के अध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार मुकाबला खासा चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एनएसयूआई से मेहुल शाह, एबीवीपी से धीरज बिष्ट और निर्दलीय प्रत्याशी आर्यन बेलवाल मैदान में हैं। आर्यन बेलवाल के निर्दलीय मैदान में उतरने से मुकाबले की तस्वीर और दिलचस्प हो गई है।

एनएसयूआई लंबे समय बाद अध्यक्ष पद पर वापसी की कोशिश कर रही है, जबकि एबीवीपी लगातार अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश में है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में होने से अध्यक्ष पद का मुकाबला तीन प्रमुख दावेदारों के बीच दिखाई दे रहा है। इन सभी दावों का अंतिम परिणाम मतदान और मतगणना के बाद ही सामने आएगा।

12 हजार छात्र-छात्राएं करेंगे मतदान

एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में इस बार करीब 12 हजार विद्यार्थी मतदान करेंगे। कॉलेज प्रशासन के अनुसार 29 सितंबर को मतदान सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक कराया जाएगा। अधिक छात्र संख्या को देखते हुए मतदान के लिए अतिरिक्त समय निर्धारित किया गया है।

चुनाव में नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी महत्वपूर्ण म

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