नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके यूपीआई (UPI) को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। केंद्र सरकार ने संसद में एक विधेयक पेश किया है, जिसके जरिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का अधिकार सरकार को मिलेगा। अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो करीब छह साल बाद बड़े यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगने की संभावना बढ़ जाएगी।

हालांकि, फिलहाल यूपीआई यूजर्स के लिए कोई नया चार्ज लागू नहीं किया गया है। अंतिम फैसला सरकार की अधिसूचना के बाद ही होगा।

क्या बदलने जा रहा है?

सरकार ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले लेनदेन पर बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कोई MDR नहीं वसूल सकते।

प्रस्तावित संशोधन के बाद यह अनिवार्य छूट खत्म हो जाएगी। इसके बजाय केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर MDR शून्य रहेगा और किन पर शुल्क लगाया जा सकेगा।

क्या होता है MDR?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता लेते हैं।

फिलहाल स्थिति यह है—

  • UPI: कोई MDR नहीं।
  • RuPay Debit Card: कोई MDR नहीं।
  • डेबिट कार्ड: लगभग 0.9% तक MDR।
  • क्रेडिट कार्ड: लगभग 1.5% तक MDR।

सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?

भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जुलाई में यूपीआई के जरिए 23.6 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। इस बाजार में PhonePe और Google Pay की बड़ी हिस्सेदारी है।

पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से यह मांग कर रही है कि यूपीआई पर पूरी तरह शून्य MDR की व्यवस्था के कारण कंपनियों और बैंकों के लिए नेटवर्क, सुरक्षा और तकनीकी ढांचे में निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से सरकार अब मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रही है।

किन लोगों पर पड़ सकता है असर?

सूत्रों के अनुसार, सरकार छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहती। प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है कि—

  • सिर्फ 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू हो।
  • या फिर केवल 1.5 करोड़ रुपये से अधिक सालाना टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों पर शुल्क लगाया जाए।

एक प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे व्यापारियों के लिए 0.3% से 0.5% तक MDR लगाया जा सकता है।

पेमेंट कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन कुल मर्चेंट पेमेंट वैल्यू का लगभग 67% हिस्सा हैं। यदि इन लेनदेन पर MDR लागू होता है, तो डिजिटल पेमेंट उद्योग को सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।

फिलहाल यह केवल एक विधायी प्रस्ताव है। जब तक संसद से विधेयक पारित नहीं हो जाता और केंद्र सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक UPI लेनदेन पहले की तरह मुफ्त ही रहेंगे

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