नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर नया विवाद सामने आया है। सूरत के आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और केंद्रीय जीएसटी (CGST) विभाग को शिकायत भेजकर अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति, CJP की फंडिंग और कानूनी सहायता कोष की जांच कराने की मांग की है।

अमित तिवारी का दावा है कि अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि सीमित सरकारी वेतन के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा का खर्च कैसे वहन किया। तिवारी ने इस मामले में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की है।
विदेश में पढ़ाई को लेकर उठे सवाल
अभिजीत दिपके ने अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। भारत लौटने के बाद उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। अब उनकी शिक्षा के खर्च और पारिवारिक आय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग से CJP की वैधता जांचने की मांग
आरटीआई एक्टिविस्ट ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि CJP किसी पंजीकृत राजनीतिक दल के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन राजनीतिक संगठन की तरह गतिविधियां संचालित कर रही है। ऐसे में आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या संगठन का पंजीकरण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत हुआ है।
उन्होंने यह भी मांग की कि यदि संगठन पंजीकृत नहीं है, तो उसके नाम पर जुटाए जा रहे फंड और राजनीतिक गतिविधियों की जांच कराई जानी चाहिए।
कानूनी सहायता कोष पर भी सवाल
अमित तिवारी ने केंद्रीय जीएसटी विभाग को भी पत्र भेजकर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित एक करोड़ रुपये के कानूनी सहायता कोष की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित वित्तीय लेन-देन और कर नियमों का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि कपिल सिब्बल ने हाल ही में CJP के कानूनी सहायता कोष में एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। यह फंड नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए बनाया गया था।
आपत्तिजनक बयानों की भी शिकायत
अमित तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके अलावा विदेशी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री के संबंधों को लेकर भी विवादित बयान दिए गए। इन आरोपों को लेकर भी संबंधित एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है।
