नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे की भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह अवैध कब्जाधारी ही क्यों न हो, कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना केवल प्रशासनिक नोटिस के आधार पर बेदखल नहीं किया जा सकता।

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वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को अचल संपत्ति से जबरन बेदखल करना संवैधानिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थापित कब्जे को हटाने के लिए सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है और केवल विधि सम्मत कार्रवाई के बाद ही बेदखली की जा सकती है।

क्या है मामला?

मामला मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क्स), नॉर्दर्न रेलवे, देहरादून द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को जारी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं का दावा था कि विवादित संपत्ति पर उनका मालिकाना हक है। उनका आरोप था कि रेलवे अधिकारियों ने उनके मकानों पर नोटिस चस्पा कर निर्धारित समय के भीतर भूमि खाली करने के निर्देश दिए, जबकि उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह घुसपैठिया हो या कथित अवैध कब्जाधारी, बिना सक्षम न्यायालय के आदेश और विधिक प्रक्रिया का पालन किए जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता। यदि भूमि का स्वामित्व किसी संस्था या व्यक्ति के पास है, तब भी उसे कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि “उचित कानूनी प्रक्रिया” का अर्थ है कि संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और सक्षम न्यायालय सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद ही बेदखली का आदेश पारित करे।

रेलवे का नोटिस किया निरस्त

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि रेलवे द्वारा जारी नोटिस किसी वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि केवल प्रशासनिक नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर भूमि खाली करने का निर्देश देना कानून की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर 2023 को जारी रेलवे के नोटिस को निरस्त कर दिया।

आगे क्या होगा?

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रेलवे की भूमि पर अवैध कब्जा है तो रेलवे प्रशासन कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा। यानी, भविष्य में विधिक प्रक्रिया अपनाकर बेदखली की कार्रवाई की जा सकती है।

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