देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर जनाक्रोश खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। शनिवार को कांग्रेस के प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद रविवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री आवास कूच किया। इस दौरान महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की भारी भागीदारी देखने को मिली। सभी ने एक सुर में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग उठाई।

रविवार सुबह कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सीपीआई, बेरोजगार संघ, उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी, गढ़वाल सभा महिला मंच समेत कई संगठनों से जुड़े लोग देहरादून के परेड ग्राउंड में एकत्र हुए। यहां से सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी रैली के रूप में मुख्यमंत्री आवास की ओर रवाना हुए।
जैसे ही रैली हाथीबड़कला क्षेत्र में पहुंची, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान अंकिता को न्याय देने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी होती रही। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हत्याकांड में सामने आए नए आरोपों के बाद अब इस मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच अनिवार्य हो गई है।

सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी की हत्या कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि संरक्षण में पनपे संगठित अपराध का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी द्वारा कथित वीआईपी का नाम सामने लाए जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर शुरुआत से ही प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से जनता को न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक पूरे मामले की सीबीआई जांच नहीं कराई जाती और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
