देहरादून: उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालयों के लिए खरीदे गए ‘जादू का पिटारा’ शैक्षणिक किट की खरीद प्रक्रिया जांच के घेरे में आ गई है। करीब 11.55 करोड़ रुपये की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने निदेशालय स्तर पर जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित फर्म की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
11,580 विद्यालयों के लिए खरीदी गई थी शैक्षणिक किट
विद्यालयी शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्य के 11,580 प्राथमिक विद्यालयों के लिए ‘जादू का पिटारा’ खरीदा था। इस पर कुल 11 करोड़ 55 लाख 33 हजार 660 रुपये खर्च किए गए। प्रत्येक विद्यालय को इस किट की खरीद के लिए 9,977 रुपये उपलब्ध कराए गए थे। अब इस पूरी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने के बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
निविदा प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
प्रारंभिक स्तर पर सामने आया है कि राज्य के सभी 13 जिलों में इस मद के तहत हुए खर्च में कथित वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में निविदाएं आमंत्रित किए जाने के बावजूद स्वीकृत बजट के बराबर राशि वाली निविदाओं को ही मंजूरी दी गई। इससे प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होने और वित्तीय गड़बड़ी की संभावना जताई जा रही है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के.एस. रावत ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच समिति खरीद प्रक्रिया की समीक्षा करेगी और संबंधित अधिकारियों व फर्मों की भूमिका तय करेगी। यदि नियमों के उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या है ‘जादू का पिटारा’?
‘जादू का पिटारा’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और एनसीईआरटी की पहल है। इसका उद्देश्य 3 से 8 वर्ष तक के बच्चों को खेल-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस किट में फ्लैश कार्ड, चित्र सामग्री, कहानी की पुस्तकें, पहेलियां, शैक्षणिक खिलौने, गणितीय शिक्षण सामग्री, अक्षर एवं संख्या कार्ड, स्थानीय भाषा आधारित गतिविधियां और शिक्षकों के लिए गतिविधि पुस्तिका जैसी सामग्री शामिल होती है।
