देहरादून: देहरादून से बिहार भेजी जा रही प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप से लदी एक ट्रक के इटावा में पकड़े जाने के बाद उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रदेशभर में सख्ती बढ़ा दी है। मामले के सामने आते ही मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, डिस्ट्रीब्यूटर्स और औषधि निर्माण इकाइयों पर व्यापक स्तर पर निरीक्षण और छापेमारी अभियान शुरू कर दिया गया है।

एफडीए के अनुसार, कोडीन युक्त कफ सिरप का दवा के साथ-साथ नशे के रूप में दुरुपयोग किया जा रहा है, जो खासकर युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इसके अवैध उत्पादन, भंडारण और सप्लाई चेन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देश पर अवैध, घटिया और दुरुपयोग की आशंका वाली दवाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस क्रम में ड्रग्स इंस्पेक्टर्स ने एक औषधि निर्माण इकाई का गहन निरीक्षण किया, जहां सिरप निर्माण प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और दस्तावेजों में गंभीर खामियां पाई गईं। अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित कंपनी में कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी गई और उसका लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया।
एफडीए ने यह भी बताया कि नैनीताल जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज मामलों में न्यायालय द्वारा चार दोषियों को 12 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 1.20 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई जा चुकी है। विभाग का मानना है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई ही दवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगा सकती है।
प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप सहित अन्य साइकोट्रॉपिक दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए सभी मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, निर्माण इकाइयों और वितरण नेटवर्क की लगातार निगरानी की जा रही है। एफडीए की रणनीति केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि निगरानी, प्रवर्तन और जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर एक साथ काम किया जा रहा है।
उत्तराखंड एक प्रमुख ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग हब है, हालांकि यहां कोडीन युक्त कफ सिरप का निर्माण सीमित कंपनियों में ही होता है। इन कंपनियों को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन), ग्वालियर द्वारा निर्धारित कोटा दिया जाता है। इस संबंध में मुख्य सचिव स्तर से सीबीएन को पत्र भेजकर यह जानकारी मांगी गई है कि किन कंपनियों को कितना कोटा आवंटित किया गया है। जानकारी मिलने से पहले ही प्रदेश की सभी संबंधित कंपनियों का निरीक्षण शुरू कर दिया गया है।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर भी अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं, जो यह जांच कर रही हैं कि दवाइयों की आपूर्ति किन-किन स्थानों पर की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के भंडारण की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है और निर्धारित मात्रा से अधिक दवाइयां मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स से सूची प्राप्त होने के बाद निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी, जिसके लिए क्यूआरटी टीम का गठन किया गया है। अन्य राज्यों के ड्रग्स कंट्रोल विभागों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
