देहरादून। उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और अवैध अतिक्रमण हटाने में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार न्यायालय के निर्देशों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद ऋषिकेश में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज हो गई है। अभियान के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम का स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध इतना उग्र था कि पथराव तक की स्थिति बन गई, जिसमें टीम के कई कर्मचारियों को हल्की चोटें भी आईं। सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
वन मंत्री ने कहा कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में रहेगी। जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा, लेकिन अवैध कब्जे को हटाना प्रशासन की प्राथमिकता है। सरकार और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया और 100 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए। विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने रेल और सड़क यातायात को बाधित किया, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा और इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
विवाद उस लीज भूमि को लेकर है, जिस पर पिछले कई वर्षों में कई कॉलोनियां बस चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन कॉलोनियों के निवासियों को अतिक्रमण की श्रेणी में चिन्हित किया जा रहा है। वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम जमीन की पैमाइश कर वास्तविक स्थिति का आकलन कर रही है, लेकिन स्थानीय विरोध जारी है।
चुनावी वर्ष में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। विपक्ष सरकार पर लोगों को उजाड़ने का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी के लिए यह कदम चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। बावजूद इसके सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश सर्वोपरि हैं और उनका पालन करना संवैधानिक जिम्मेदारी है।
