हरिद्वार: करीब दो दशक पहले देश को झकझोर देने वाला निठारी कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद नोएडा के निठारी में बच्चों और महिलाओं की मौतों से जुड़े पुराने सवाल फिर चर्चा में हैं। हालांकि, लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद निठारी से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ कायम दोषसिद्धियां अब बरकरार नहीं हैं।

दिसंबर 2006 में सामने आया था निठारी कांड

दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले और आसपास के इलाके से मानव अवशेष बरामद होने के बाद मामला सामने आया था। जांच आगे बढ़ने पर कई लापता बच्चों और महिलाओं के मामलों से इसके तार जोड़े गए और देखते ही देखते यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

पंढेर के घर में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने वाले सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। बाद में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। अलग-अलग मुकदमों में कोली को दोषी ठहराया गया और कई मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई।

2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया था बरी

करीब दो दशक चली कानूनी प्रक्रिया में अक्टूबर 2023 में बड़ा मोड़ आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली और दो मामलों में मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया।

अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों को दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना। इसके बाद राज्य की ओर से फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में संबंधित बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा।

इस तरह निठारी से जुड़े जिन मामलों में पहले कोली और पंढेर को दोषी ठहराया गया था, उनमें उनकी दोषसिद्धियां अंतिम रूप से कायम नहीं रह सकीं।

हरिद्वार में मृत मिला सुरेंद्र कोली

सुरेंद्र कोली को 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में उसकी चाय की दुकान के अंदर मृत पाया गया। पुलिस के मुताबिक, वह फंदे से लटका मिला था। घटनास्थल से सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है।

पुलिस ने मौत की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम कराया गया है। फिलहाल पुलिस ने मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

कोली की मौत के बाद निठारी कांड से जुड़े पुराने सवाल फिर उठने लगे हैं। एक पीड़ित के पिता ने कोली की मौत को लेकर संदेह जताते हुए हत्या की आशंका व्यक्त की है और जांच की मांग की है। हालांकि, यह परिजन की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

निठारी की 19 मौतों का सवाल अब भी कायम

निठारी मामले में मानव अवशेषों की बरामदगी और कई लोगों के लापता होने की घटनाओं ने देशभर में गंभीर सवाल खड़े किए थे। लेकिन लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद संबंधित मामलों में कोली और पंढेर की दोषसिद्धियां कायम नहीं रह सकीं।

ऐसे में यह सवाल आज भी चर्चा में है कि निठारी में हुई मौतों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार व्यक्ति कौन था?

हालांकि, सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत को निठारी कांड से सीधे जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा। उनकी मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर तस्वीर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

करीब दो दशक बाद भी क्यों बना हुआ है रहस्य?

निठारी कांड की जांच से लेकर मुकदमों और अदालतों के फैसलों तक का सफर करीब 20 साल लंबा रहा। इस दौरान मामले में गिरफ्तारी, दोषसिद्धि, मौत की सजा, अपील और अंततः बरी किए जाने तक कई अहम मोड़ आए।

अब सुरेंद्र कोली की मौत ने एक बार फिर इस मामले को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम के आधार पर निठारी कांड को लेकर कोई नया निष्कर्ष निकालने से पहले हरिद्वार पुलिस की जांच और उपलब्ध आधिकारिक साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी है।

By

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *