हल्द्वानी: नैनीताल जिले में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को लेकर सामने आए एक मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हल्द्वानी तहसील से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। तहसीलदार को प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
![]()
शिकायत के बाद हुई दस्तावेजों की जांच
मामला सरकारी नियुक्ति में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल से जुड़ा है। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच में सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ का मूल निवास हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में है और उन्हें वहां पहले ही अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था।
मामले की सुनवाई के लिए 3 अगस्त 2026 को जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल और जिला होम्योपैथिक अधिकारी चंपावत शामिल रहे।
पहले हिमाचल से मिला था SC प्रमाण पत्र
प्रशासन की जांच के मुताबिक, तहसीलदार कसौली ने 11 अक्टूबर 1999 को डॉ. मनीषा कायथ को हिमाचल प्रदेश की छिब्बे जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया था। इसके बाद विवाह के पश्चात उन्होंने हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को उत्तराखंड की धोबी जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया।
इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ था।
चंपावत में NHM के तहत कर रही हैं काम
वर्तमान में डॉ. मनीषा कायथ चंपावत जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा पर तैनात हैं। जांच के दौरान हल्द्वानी तहसील से जारी उनके अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर आपत्ति सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का किया गया परीक्षण
स्क्रूटनी कमेटी ने मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के Ranjana Kumari बनाम State of Uttaranchal और उत्तराखंड हाईकोर्ट के Smt. Anshu Sagar बनाम State of Uttarakhand मामलों में दिए गए निर्णयों का भी परीक्षण किया।
कमेटी के अनुसार, अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ संबंधित व्यक्ति के मूल राज्य से जुड़े प्रावधानों के आधार पर ही राज्य की सेवाओं में दिया जा सकता है। इन्हीं प्रावधानों के आधार पर हल्द्वानी तहसील से जारी प्रमाण पत्र को नियमों के अनुरूप नहीं माना गया।
प्रमाण पत्र निरस्त, जब्ती के आदेश
स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने हल्द्वानी तहसील से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया। तहसीलदार को प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही संबंधित विभागों को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजे गए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि मामले में लागू नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
