उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और अवैध निर्माण से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की याचिका स्वीकार करते हुए हल्द्वानी में लंबित विजिलेंस के दो आपराधिक मामलों को देहरादून स्थित विशेष सीबीआई अदालत में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ ने कहा कि सीबीआई इस मामले की विस्तृत जांच पूरी कर पहले ही देहरादून की विशेष भ्रष्टाचार निवारण (CBI) अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ऐसे में एक ही मामले से जुड़े मुकदमों की अलग-अलग अदालतों में सुनवाई होने से कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब विजिलेंस द्वारा दर्ज दो प्रमुख मुकदमे ‘राज्य बनाम बृज बिहारी शर्मा’ और ‘राज्य बनाम किशन चंद’ की सुनवाई देहरादून स्थित विशेष सीबीआई अदालत में होगी। ये दोनों मामले वर्ष 2022 में विजिलेंस इस्टेब्लिशमेंट, हल्द्वानी (नैनीताल सेक्टर) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निष्पक्ष, प्रभावी और एकरूप सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होना न्यायहित में है। इससे समानांतर कार्यवाही के कारण उत्पन्न होने वाली तकनीकी और प्रक्रियात्मक बाधाओं से भी बचा जा सकेगा।

सीबीआई की चार्जशीट में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक सहित आठ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें तत्कालीन निदेशक राहुल, कालागढ़ टाइगर रिजर्व डिवीजन के तत्कालीन उप वन संरक्षक (DCF) किशन चंद, तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी और सोनानदी-पाखरो रेंज के तत्कालीन रेंजर बृज बिहारी शर्मा प्रमुख रूप से शामिल हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध निर्माण, वित्तीय अनियमितताओं, अवैध कटान और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप हैं। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी, 218, 409, 467 और 471 के अलावा वन (संरक्षण) अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कॉर्बेट भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई अब पूरी तरह देहरादून स्थित विशेष सीबीआई अदालत में केंद्रित होगी, जहां सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया संचालित की जाएगी।

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