देहरादून के परेड ग्राउंड में पहली बार आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव ने राजधानी को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित चार दिवसीय इस महोत्सव में उत्तराखंड के विभिन्न अंचलों की लोक परंपराओं, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। बड़ी संख्या में जुटी भीड़ ने आयोजन को ऐतिहासिक बताया।

महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी से कार्यक्रम और भी खास बन गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी ने मंच से जनता को संबोधित किया। मातृशक्ति की भूमिका पर बोलते हुए उनका संबोधन भावनात्मक हो गया, जिससे पूरा पंडाल संवेदनशील माहौल में डूब गया।
गीता धामी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे मां और परिवार का अहम योगदान होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की माता विशना देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके त्याग और समर्पण के बिना मुख्यमंत्री का यह सफर संभव नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि बीते चार वर्षों में मुख्यमंत्री ने परिवार के लिए समय न निकालकर प्रदेश की सेवा को प्राथमिकता दी।
उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए अहम फैसलों का जिक्र करते हुए बताया कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया और हजारों युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मुख्यमंत्री पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
समान नागरिक संहिता और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर फैल रही भ्रांतियों पर गीता धामी ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को पहले ही देश की सर्वोच्च अदालतों से मान्यता मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने केवल पहले से मौजूद व्यवस्था को स्पष्ट और व्यवस्थित किया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों से प्रदेश की महिलाएं सशक्त हो रही हैं और स्वयं सहायता समूहों व सामाजिक योजनाओं में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। गीता धामी का यह भावुक संबोधन उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन का सबसे चर्चित और यादगार क्षण बनकर सामने आया।
